लाखों और करोड़ों की जब्ती और कागजी कार्रवाई
पंजाब की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने और गैरकानूनी गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए राज्य के भीतर लगातार निरीक्षण किए जा रहे हैं। इन छापों और जांच अभियानों के दौरान नियमों की अनदेखी करने वाली कुल 214 पंजीकृत और गैर-पंजीकृत इकाइयों पर शिकंजा कसा गया। इन सभी स्थानों से भारी मात्रा में प्रतिबंधित और अवैध सामग्री बरामद की गई जिसकी कुल कीमत 20.64 करोड़ रुपये आंकी गई है। प्रशासन ने इन गंभीर उल्लंघनों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कुल 520 दुकानदारों और विक्रेताओं के अनुमति पत्र यानी लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित कर दिए हैं। इसके अलावा 22 अन्य मामलों में अनुमति पत्रों को पूरी तरह से रद्द करने की कठोर कार्रवाई भी अमल में लाई गई है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के मंत्री डॉ। बलबीर सिंह के प्रशासनिक निर्देशों के आधार पर यह पूरी मुहिम चलाई जा रही है ताकि आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर शिकंजा कसा जा सके और समाज में फैल रही इस गंभीर समस्या को जड़ से समाप्त किया जा सके।
अदालती मामले और कानूनी कार्रवाई का विवरण
नियमों को ताक पर रखकर काम करने वाले कारोबारियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा भी तेजी से कसा जा रहा है। समीक्षाधीन समय के दौरान कानून की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन करने वाले दोषियों के विरुद्ध कुल 54 नए अदालत वाद दर्ज किए गए। इनमें से 35 मामलों में अदालतों ने फैसला सुनाते हुए दोषियों को सजा सुनाई और साथ ही उन पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया। राज्य भर की विभिन्न जिला अदालतों में इस समय कुल 650 मामले लंबित चल रहे हैं जिनकी सुनवाई नियमित रूप से की जा रही है। पंजाब सरकार ने जनता के कल्याण को सर्वोपरि रखते हुए स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े इन मामलों में किसी भी प्रकार की ढील नहीं बरती जाएगी और सभी क्षेत्रों में औषधि कानूनों का पूरी सख्ती के साथ पालन सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त राज्य में बिक्री के लिए उपलब्ध आठ प्रकार के अलग-अलग औषधि फॉर्मूलेशन के स्टॉक पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है ताकि इनका दुरुपयोग रोका जा सके। हालांकि ऑनलाइन माध्यमों से होने वाली बिक्री के लिए कोई पुख्ता और स्पष्ट नियामक ढांचा न होने के कारण धरातल पर इन नियमों को पूरी प्रभावशीलता के साथ लागू करने में अभी भी कुछ व्यावहारिक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
नीतिगत बदलाव और केंद्र सरकार के स्तर पर उठाए गए कदम
औषधियों के दुरुपयोग को रोकने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से भी महत्वपूर्ण विधिक कदम उठाए गए हैं। भारत सरकार ने अपने 13 मई 2026 के एक आधिकारिक अधिसूचना पत्र क्रमांक जी.एस.ए। 377(ई) के माध्यम से ‘प्रीगैब्लिन’ नामक दवा को औषधि नियम 1945 के विशेष शेड्यूल एच1 के अंतर्गत शामिल कर लिया है। निर्धारित समय सारणी के अनुसार यह नया नियम आगामी 12 नवंबर 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो जाएगा। इससे पहले यह विशिष्ट औषधि अधिनियम 1940 या संबंधित नियमों के किसी भी शेड्यूल के दायरे में नहीं आती थी जिसके कारण इसके नियंत्रण में मुश्किलें आती थीं। राज्य सरकार ने इसके अनियंत्रित उपयोग और दुरुपयोग पर प्रभावी रोक लगाने के खातिर कई बार औपचारिक पत्र लिखकर केंद्र सरकार से त्वरित विधिक हस्तक्षेप की मांग उठाई थी। इसके अलावा भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने विभिन्न कंपनियों द्वारा तैयार की जाने वाली दवाओं की आसमान छूती कीमतों और एक जैसे सक्रिय औषधीय तत्वों वाली अलग-अलग ब्रांड की औषधियों के दामों में पाए जाने वाले भारी अंतर के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया है। सरकार का यह भी मानना है कि उच्चतम न्यायालय के हालिया हस्तक्षेप और दिशा-निर्देशों से पहले केंद्र स्तर पर इस गंभीर विषय को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया था जिससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।