सोशल मीडिया पर वायरल विवादित तस्वीर
त्योहारों के इस माहौल के बीच बिहार की राजनीति में पोस्टरों के माध्यम से आरोप-प्रत्यारोप का एक नया दौर शुरू हो चुका है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भारतीय जनता पार्टी के नेता नीरज कुमार शर्मा द्वारा एक विवादित चित्र साझा किया गया था। इस डिजिटल चित्रण में विधानसभा के भीतर नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे तेजस्वी यादव को दस सिर वाले शक्तिशाली रावण के रूप में दर्शाया गया है। इस कलाकृति में उन्हें माँ दुर्गा के चरणों के अत्यंत समीप गिरा हुआ दिखाया गया है। भाजपा नेता ने अपने इस ऑनलाइन संदेश के माध्यम से इस पूरी रचना को दस सिर और दस झूठ का शीर्षक दिया था। उन्होंने अपने उस संदेश में विरोधी दल के नेता पर परिवारवाद की राजनीति करने और भ्रष्टाचार में लिप्त होने के गंभीर आरोप जड़े थे। इसके अलावा, बेरोजगार युवाओं से झूठे वादे करने, अपराध को खुला संरक्षण देने और पूरे राज्य को कथित रूप से पुराने जंगलराज की ओर धकेलने जैसी बातें कहीं गई थीं। उस डिजिटल पोस्ट में जमीन के बदले नौकरी यानी लैंड फॉर जॉब मामले का विशेष रूप से उल्लेख किया गया था। संबंधित नेता ने यह दावा भी सरेआम किया था कि अब उन तमाम पीड़ित नागरिकों की जमीनों को वापस लौटाने का उचित समय आ चुका है। इन तीखे बयानों और आक्रामक चित्रण के कारण राजनीतिक पटल पर गर्माहट और अधिक बढ़ गई है।
राष्ट्रीय जनता दल का कड़ा पलटवार
विपक्षी दल की ओर से इस आक्रामक डिजिटल पोस्ट पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए फौरन कड़ा ऐतराज जताया गया है। राष्ट्रीय जनता दल के आधिकारिक प्रवक्ता एजाज अहमद ने आगे आकर इस पूरे मामले पर सीधा पलटवार किया है। उन्होंने अपनी पार्टी के नेता तेजस्वी यादव के पिछले सत्र के सत्रह महीनों के उपमुख्यमंत्री कार्यकाल का पूरा विस्तृत रिपोर्ट कार्ड सबके सामने सार्वजनिक कर दिया। राजद के इस प्रवक्ता ने यह स्पष्ट शब्दों में कहा कि विपक्षी खेमा केवल अनर्गल और बेबुनियाद आरोपों की राजनीति करने में व्यस्त रहता है। जबकि इसके विपरीत, तेजस्वी यादव के उस छोटे से कार्यकाल के दौरान पूरे बिहार राज्य के भीतर विकास और रोजगार की एक बेहद ठोस और मजबूत जमीन तैयार की गई थी। पार्टी प्रवक्ता ने आधिकारिक आंकड़ों का पूरा ब्योरा देते हुए यह दावा किया कि उस सत्रह महीने की अवधि में राज्य के प्रतिभाशाली युवाओं को साढ़े पाँच लाख से भी अधिक सरकारी नौकरियाँ प्रदान की गईं। इसके अतिरिक्त, राज्य भर में दो लाख से ज्यादा शिक्षकों की पूरी तरह पारदर्शी नियुक्तियाँ भी सफलतापूर्वक संपन्न कराई गईं। इतना ही नहीं, आने वाले समय में होने वाली भविष्य की भर्तियों के लिए साढ़े तीन लाख नए पदों का सृजन भी किया गया था। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि त्योहार के इस पवित्र अवसर पर भारतीय जनता पार्टी का ऐसा नकारात्मक रवैया उनकी ओछी मानसिकता को दर्शाता है।
त्योहारी माहौल में राजनीतिक बयानबाजी
त्योहारों के इन दिनों में इस तरह के राजनीतिक हमलों और पोस्टरों के जरिए माहौल को गर्माने का प्रयास किया जा रहा है। आम जनता और मतदाता वर्ग काम करने वालों और केवल बयानबाजी करने वालों के बीच के वास्तविक अंतर को बहुत अच्छी तरह से समझता है। एक तरफ जहाँ विपक्षी दल अपने नेता के कार्यकाल के दौरान किए गए रोजगार सृजन और विकास कार्यों के बड़े-बड़े आँकड़े जनता के बीच रख रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ सत्ता से जुड़े दल पुराने मामलों और भ्रष्टाचार के आरोपों को नए सिरे से हवा देकर राजनीतिक लाभ उठाने की फिराक में हैं। इस पूरी घटना ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि पर्व-त्योहारों के इस समय में भी राजनीतिक दल एक-दूसरे पर हमला बोलने का कोई भी मौका हाथ से जाने नहीं देते हैं। जनता इन सभी गतिविधियों को बड़े गौर से देख रही है और आने वाले समय में इसका उचित मूल्यांकन भी करेगी। राजद के नेताओं का यह साफ़ तौर पर कहना है कि जनता को झूठे और भ्रामक प्रचार से कभी भी भ्रमित नहीं किया जा सकता है क्योंकि विकास के धरातल पर किए गए कार्य ही असलियत बयां करते हैं। इस प्रकार की राजनीतिक बयानबाजी से राज्य की जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने का प्रयास लगातार किया जा रहा है, जिसका करारा जवाब जनता आने वाले समय में अपने तरीके से देगी।