उच्च सदन के लिए प्रियंका रावत का चयन
भारतीय जनता पार्टी ने बाराबंकी की सक्रिय नेता प्रियंका सिंह रावत को राज्यसभा भेजने की घोषणा की है। यह महत्वपूर्ण निर्णय जिले के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है क्योंकि वे इस पद तक पहुंचने वाली केवल तीसरी महिला होंगी। प्रियंका के चयन को उनके संगठन के प्रति समर्पण और जमीन पर की गई कड़ी मेहनत का परिणाम माना जा रहा है। पार्टी ने उन्हें उच्च सदन का सदस्य बनाकर नई जिम्मेदारी सौंपी है। इस नामांकन के साथ ही प्रियंका सिंह रावत का नाम उन चुनिंदा राजनेताओं में शामिल हो गया है जिन्होंने बाराबंकी का प्रतिनिधित्व उच्च सदन में किया है। स्थानीय स्तर पर उनके इस चयन की काफी चर्चा है। भाजपा के भीतर उनके बढ़ते कद और संगठनात्मक कार्यों के प्रति उनकी निष्ठा को नेतृत्व ने उचित सम्मान दिया है। वे अब संसदीय राजनीति के एक बड़े मंच पर अपनी भूमिका निभाएंगी और जिले के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का कार्य करेंगी।
राजनीतिक सफर और संगठनात्मक जिम्मेदारी
प्रियंका सिंह रावत का चुनावी और राजनीतिक करियर वर्ष 2014 में प्रारंभ हुआ था। उस समय केवल 28 वर्ष की आयु में उन्होंने बाराबंकी की सुरक्षित लोकसभा सीट से चुनाव लड़ते हुए कांग्रेस के अनुभवी दिग्गज डॉ. पीएल पुनिया को पराजित किया था। उन्होंने उस चुनाव में दो लाख से अधिक मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। वर्ष 2019 में जब उन्हें दोबारा टिकट नहीं मिल पाया, तो उन्होंने पार्टी के साथ धैर्य बनाए रखा और अपना काम जारी रखा। भाजपा ने उनकी सक्रियता को देखते हुए उन्हें प्रदेश महामंत्री के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया। उन्होंने संगठन के भीतर अपनी भूमिका को बहुत ही कुशलता और निष्ठा के साथ निभाया है। हाल ही में उन्हें फिर से महामंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई थी जिसे उन्होंने बखूबी पूरा किया। उनकी कार्यक्षमता और पार्टी के प्रति अटूट विश्वास ने उन्हें राज्यसभा की दहलीज तक पहुंचाया है। संगठन में उनके द्वारा किए गए जमीनी कार्यों का ही यह परिणाम है कि आज उन्हें यह अवसर मिला है।
जिले की गौरवशाली राजनीतिक विरासत
बाराबंकी का अपना एक समृद्ध राजनीतिक इतिहास रहा है और प्रियंका सिंह रावत इसी विरासत में आगे बढ़ने वाली तीसरी महिला हैं। इससे सात दशक पूर्व लेखिका और स्वतंत्रता सेनानी बेगम अनीस किदवई जिले की पहली महिला थीं जो राज्यसभा सदस्य बनी थीं। उनका पहला कार्यकाल वर्ष 1956 से 1962 तक चला और दूसरा कार्यकाल वर्ष 1962 से दो अप्रैल 1968 तक रहा था। बेगम किदवई को उनके जेठ और स्वतंत्रता सेनानी रफी अहमद किदवई के वर्ष 1954 में हुए आकस्मिक निधन के पश्चात कांग्रेस पार्टी द्वारा उच्च सदन में भेजा गया था। उनके बाद मोहसिना किदवई का नाम आता है, जिन्होंने 30 जून 2004 से 29 जून 2016 तक राज्यसभा में प्रतिनिधित्व किया था। उस समय कांग्रेस राष्ट्रीय राजनीति का मुख्य केंद्र हुआ करती थी, जबकि वर्तमान परिदृश्य में भाजपा राजनीति की धुरी है। अब इसी ऐतिहासिक कड़ी में प्रियंका रावत का नाम शामिल होकर परंपरा को आगे बढ़ाएगा, जो जिले के लिए एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है।