जो US लगा रहा था एक्स्ट्रा टैरिफ, अब वही पढ़ रहा कसीदे; भारत की तेल आयात नीति पर क्या बोले मार्को रुबियो
‘उतनी तो श्रीहरिकोटा से लॉन्चिंग नहीं होती जितनी...', PM मोदी ने कांग्रेस पर कसा जोरदार तंज; जानें और क्या
फ़्रांस के राष्ट्रपति विदेशी नेताओं पर भड़के, 'इस्लामी और प्रवासी भीड़' के आरोप पर दिया जवाब
असम सरकार का बड़ा फैसला, रिटायरमेंट से 1 साल पहले शुरू होगी पेंशन की प्रक्रिया
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: कोर्ट में फूट-फूटकर रोई राधा, अब पुलिस उगलवाएगी राज
सऊदी अरब में दो बांग्लादेशियों को मौत की सज़ा दिए जाने से जुड़े वे सवाल जो हैं अनसुलझे
कौन हैं निर्मला सीतारमण के पति परकला प्रभाकर जो प्रकाश राज और अभिजीत दिपके साथ CJP का प्रदर्शन में शामिल होंगे
‘भारत हम सभी के लिए उम्मीद की किरण’, पोलैंड के प्रधानमंत्री ने की PM मोदी की जमकर तारीफ
SENSEX लोड हो रहा...| NIFTY लोड हो रहा...| GOLD (10g) ₹—| SILVER (10g) ₹—| USD/INR ₹—| CRUDE OIL $—|Uttar Pradesh — लोड हो रहा है|--:--:--| लाइव अपडेट
राजनीतिक बयानबाजी तेज: चार्जशीट में नाम भाजपा ने खुद लिखे, अब कांग्रेस सरकार कर रही कार्रवाई: CM सुक्खू
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से जुबानी जंग तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विपक्षी दल पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि जिन लोगों के नाम चार्जशीट में शामिल हैं, उन्हें भाजपा ने खुद ही जोड़ा था और वर्तमान कांग्रेस सरकार अब केवल उसी आधार पर नियमों के अनुसार कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ा रही है।
A
Ankit Yadav
26 अग 2026, 17:02
हिमाचल प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों प्रशासनिक और कानूनी कदमों को लेकर गहमागहमी का माहौल बना हुआ है। राज्य की वर्तमान कांग्रेस सरकार द्वारा उठाए जा रहे विभिन्न कदमों और प्रशासनिक मामलों पर विपक्ष लगातार सवालिया निशान खड़े कर रहा है। इसी बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक तीखा बयान देते हुए स्पष्ट किया है कि सरकार किसी भी प्रकार की बदले की भावना से काम नहीं कर रही है। उनका साफ कहना है कि जिन व्यक्तियों या मामलों के नाम चार्जशीट में दर्ज किए गए हैं, उन्हें किसी अन्य ने नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी ने अपने कार्यकाल के दौरान खुद ही संकलित किया था।
कांग्रेस सरकार का स्पष्ट रुख
मुख्यमंत्री सुक्खू ने मीडिया से बातचीत करते हुए जोर देकर कहा कि मौजूदा सरकार तो केवल उसी दस्तावेज और चार्जशीट के आधार पर आगे बढ़ रही है जिसे भाजपा ने अपने समय में तैयार करवाया था। जब पिछली व्यवस्था द्वारा ही उन नामों को औपचारिक रूप से सूचियों में शामिल किया जा चुका है, तो अब कांग्रेस सरकार द्वारा उन पर प्रशासनिक या कानूनी कदम उठाए जाने पर विरोध जताना पूरी तरह से अनुचित और बेबुनियाद है। सरकार का यह रुख साफ करता है कि वह प्रशासनिक पारदर्शिता और तय नियमों के तहत ही सभी मामलों की समीक्षा कर रही है और उसमें किसी भी प्रकार का राजनीतिक पूर्वाग्रह नहीं है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और सियासी पारा
दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम के बाद राज्य में राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। विपक्षी दल के नेता लगातार सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से काम करने और द्वेषपूर्ण राजनीति करने के आरोप लगा रहे हैं। उनका यह दावा है कि वर्तमान प्रशासन बेवजह मामलों को तूल दे रहा है और राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए सरकारी तंत्र का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, सत्तारूढ़ दल और मुख्यमंत्री की तरफ से इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया गया है। मुख्यमंत्री का तर्क इन दाوات को कमजोर करता है क्योंकि जिन दस्तावेजों को आधार बनाया जा रहा है, वे खुद विपक्षी दल के पिछले शासनकाल की देन हैं।
आगामी राजनीतिक समीकरण
आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और अधिक राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है क्योंकि दोनों ही दल जनता के बीच अपनी-अपनी बात को सही साबित करने में जुटे हैं। जहां एक तरफ कांग्रेस सरकार इसे प्रशासनिक निरंतरता और नियमों के पालन के रूप में पेश कर रही है, वहीं भाजपा इसे चुनावी राजनीति और दबाव की रणनीति बता रही है। इस प्रकार के बयानों और पलटवारों से यह स्पष्ट है कि राज्य की राजनीति में यह मुद्दा आने वाले समय में भी बहस का एक प्रमुख केंद्र बना रहेगा, जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक मोर्चे पर दोनों पक्षों के बीच तनाव और अधिक गहरा सकता है।