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राजनीति

राजनीतिक भागीदारी पर हमला: असदुद्दीन ओवैसी ने विपक्षी दलों पर साधा तीखा निशाना

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश के बहराइच में विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल केवल चुनाव के समय समुदाय का इस्तेमाल करते हैं। राजनेताओं ने अल्पसंख्यकों को सिर्फ दरी बिछाने और नारेबाजी करने वाला समझ रखा है।

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Ankit Yadav
05 अक्ट 2026, 11:31
राजनीतिक भागीदारी पर हमला: असदुद्दीन ओवैसी ने विपक्षी दलों पर साधा तीखा निशाना

बहराइच में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक

रविवार को श्रावस्ती जिले में एक जनसभा में जाने के क्रम में असदुद्दीन ओवैसी बहराइच पहुंचे थे। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और हैदराबाद के लोकसभा सांसद ने वहां एक होटल में अपने दल के कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। उन्होंने वहां उपस्थित लोगों को संबोधित किया और अपनी आगे की राजनीतिक यात्रा के बारे में जानकारी दी। ओवैसी के बहराइच पहुंचने की खबर मिलने के बाद बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता होटल के बाहर तथा आसपास जमा हो गए थे। सभी कार्यकर्ताओं से मिलने और उन्हें जरूरी दिशा निर्देश देने के बाद वह श्रावस्ती के लिए रवाना हो गए। श्रावस्ती के भिनगा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले राजापुर रानी इलाके में पार्टी की एक बड़ी जनसभा प्रस्तावित थी। राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हुई हैं कि इस जनसभा के माध्यम से पार्टी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी पकड़ कितना मजबूत कर पाती है। विपक्षी दलों की राजनीति और चुनावी तैयारियों के बीच इस नए घटनाक्रम ने प्रदेश के सियासी गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। कार्यकर्ताओं में भी इस दौरे के बाद काफी उत्साह देखने को मिला और उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

विपक्षी दलों की कार्यशैली पर कड़े सवाल

बैठक के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने देश और प्रदेश के विपक्षी दलों की नीतियों पर जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधी दल कभी नहीं चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश के भीतर मुसलमानों का कोई मजबूत राजनीतिक संगठन खड़ा हो सके। उनका कहना था कि विपक्ष केवल चुनावी मौसम में अल्पसंख्यक वर्ग का उपयोग अपने फायदे के लिए करता है। विपक्षी दलों की सोच यह है कि समुदाय का व्यक्ति केवल रैलियों में दरी बिछाए और नेताओं के समर्थन में नारे लगाए। इसके बाद मतदान करके अपने घरों को वापस लौट जाए और सत्ता में हिस्सेदारी की बात न करे। ओवैसी ने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि लोग केवल एक वोट बैंक बनकर न रहें। उन्हें अपनी वास्तविक राजनीतिक हिस्सेदारी और सत्ता में भागीदारी के लिए खुद ही आवाज उठानी होगी। उन्होंने प्रदेश में मुसलमानों के ऊपर हो रहे अत्याचारों और घटनाओं का भी कड़ा जिक्र किया। मस्जिदों को गिराए जाने और समुदाय के लोगों के साथ अन्याय होने की बातें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी मुद्दों पर चुप बैठने के बजाय मुखर होकर विरोध जताना जरूरी हो गया है ताकि हालात में सुधार आ सके।

बी टीम के आरोपों पर ओवैसी का पलटवार

अपनी पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन को भारतीय जनता पार्टी की बी टीम कहे जाने वाले आरोपों पर भी ओवैसी ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने विरोधी दलों से सीधा सवाल पूछा कि यदि उनकी पार्टी वास्तव में भाजपा की बी टीम है तो फिर वर्ष 2014, 2017, 2022 और 2024 के आम तथा विधानसभा चुनावों में विपक्ष को करारी हार क्यों झेलनी पड़ी थी। ओवैसी ने कहा कि विपक्षी दल अपनी खुद की राजनीतिक विफलताओं और कमजोरियों को छुपाने के लिए ऐसे झूठे आरोप लगाते रहते हैं। उन्होंने प्रदेश की राजनीति में अपनी पार्टी को एक पूर्ण रूप से स्वतंत्र राजनीतिक विकल्प के तौर पर पेश किया। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के मुद्दे पर भी उन्होंने अपनी पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी इस मामले में सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाली संस्था थी, हालांकि अदालत ने उनकी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। मुस्लिम राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर दिए गए उनके ये तीखे बयान आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बहुत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इससे राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है और दल अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं।

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