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राजनीतिक भूचाल: पूर्व पीए पर ईडी की कार्रवाई के बाद हरीश रावत ने छोड़े कांग्रेस के सभी पद
उत्तराखंड की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने अपने पूर्व निजी सहायक पर हुई प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की कार्रवाई के विरोध और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पार्टी के तमाम पदों से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने एक पत्र लिखकर अपनी नाराजगी और फैसले के कारणों को सार्वजनिक किया है।
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Ankit Yadav
13 सित 2026, 13:07
भारतीय राजनीति के गलियारों से इस वक्त एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता माने जाने वाले हरीश रावत ने पार्टी के तमाम संगठनात्मक पदों से अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया है। उनके इस अप्रत्याशित कदम से राज्य से लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक राजनीतिक सरगर्मी काफी ज्यादा बढ़ गई है। मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम उनके एक पूर्व निजी सहायक के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई सख्त कार्रवाई के ठीक बाद सामने आया है। इस घटना के बाद से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो चुका है और विरोधी दलों को भी बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा मिल गया है।
नोट लिखकर स्पष्ट की अपने फैसले की वजह
वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने अपने इस सियासी अलगाव के पीछे के कारणों को स्पष्ट करने के लिए एक लिखित नोट भी साझा किया है। इस नोट के माध्यम से उन्होंने अपनी बात खुलकर रखी है और यह बताया है कि आखिर क्यों उन्हें पार्टी के भीतर तमाम जिम्मेदारियों को छोड़ना पड़ा। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के घटनाक्रम से आने वाले समय में पार्टी के भीतर अंदरूनी कलह और अधिक बढ़ सकती है। कांग्रेस पार्टी के भीतर इस हाई-प्रोफाइल इस्तीफे को लेकर विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जहां एक तरफ समर्थक इसे उनका व्यक्तिगत और नैतिक फैसला बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल इसे बचाने की रणनीति या दबाव की राजनीति करार दे रहे हैं।
केंद्रीय जांच एजेंसियों की सक्रियता इन दिनों देश के कई राज्यों में लगातार बढ़ती जा रही है, जिसका असर अब उत्तराखंड के बड़े राजनीतिक चेहरों पर भी साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। लखनऊ, बिहार और दिल्ली से लेकर देश के अन्य हिस्सों तक राजनीतिक उठापटक का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। ऐसे में हरीश रावत जैसा कद्दावर नेता यदि अपने पदों से इस्तीफा देता है, तो इसका सीधा असर चुनावी समीकरणों और पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ना तय माना जा रहा है। पार्टी के उच्च नेतृत्व के सामने अब यह एक बड़ी चुनौती बन गई है कि वे इस स्थिति से कैसे निपटें और नाराज चल रहे दिग्गजों को किस प्रकार मनाएं।
आगामी दिनों में इस पूरे मामले पर सियासत के और अधिक गरमाने के पूरे आसार बने हुए हैं। कांग्रेस पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी इस संवेदनशील मसले पर फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं ताकि किसी भी तरह के गलत संदेश से बचा जा सके। दूसरी ओर, जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई पर भी सबकी निगाहें टिकी हुई हैं कि इस प्रकरण में और कौन-कौन से नए नाम सामने आ सकते हैं। हरीश रावत का यह कदम निश्चित रूप से राज्य की राजनीति में एक नए भूचाल का संकेत दे रहा है, जिसके दूरगामी परिणाम आने वाले चुनावों में देखने को मिल सकते हैं।