उपमुख्यमंत्री की सलाह पर सियासी बवाल
उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में उस समय एक नया विवाद खड़ा हो गया जब राज्य के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने युवाओं को लेकर एक विवादित सुझाव दिया। उन्होंने 23 सितंबर को लखनऊ शहर में आयोजित एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक रूप से यह बात कही थी। उस विशेष अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मंच पर ही मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री ने युवाओं को पारंपरिक रोजगार और सरकारी नौकरियों के पीछे न भागने की सलाह दी थी। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया जब राज्य सरकार पहले से ही आगामी विधानसभा चुनावों से पहले एक लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा कर चुकी है। इस वादे के बिल्कुल विपरीत उप-मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि वे सरकारी पदों के चक्कर में अपना समय बर्बाद न करें। उनके इस बयान ने प्रशासन के लिए एक अप्रत्याशित शर्मिंदगी की स्थिति पैदा कर दी है क्योंकि विपक्षी दलों को सरकार पर हमला करने का एक और मौका मिल गया है। लखनऊ के एक प्रभावशाली विधायक होने के नाते पाठक को राज्य सरकार में तीसरा सबसे शक्तिशाली व्यक्ति माना जाता है। ऐसे पद पर बैठे किसी वरिष्ठ नेता द्वारा इस प्रकार का बयान देना राजनीतिक रूप से बहुत संवेदनशील माना जा रहा है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने स्वरोजगार अपनाने पर जोर दिया था।
सपा ने वीडियो जारी कर घेरा
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के इस बयान को मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना लिया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन करके इस पूरे मामले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। अपनी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने एक वीडियो क्लिप भी सार्वजनिक रूप से चलाई जिसमें दोनों नेताओं के बयान साथ-साथ दिखाए गए थे। इस वीडियो में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा एक लाख सरकारी नौकरियां देने के वादे और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक द्वारा नौकरी न करने की सलाह को एक साथ रखा गया था। विपक्षी दल ने इस वीडियो के जरिए यह दिखाने का प्रयास किया कि सरकार के मुखिया और उनके उपमुख्यमंत्री के बीच तालमेल की कमी है। पार्टी ने एक तीखा बयान जारी करते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार का मुख्य इंजन और उप-इंजन आपस में ही टकरा रहे हैं। विपक्षी दलों का यह भी कहना है कि ठीक वैसे ही जैसे केंद्र और राज्य के बीच घर्षण रहता है, वैसा ही मतभेद अब स्थानीय स्तर पर भी खुलकर सामने आने लगा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी इस वीडियो और उपमुख्यमंत्री के सुझावों को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई उपयोगकर्ताओं ने इस अजीब स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कटाक्ष किया कि एक तरफ सरकार नौकरियां देने का दावा कर रही है और दूसरी तरफ मंत्री महोदय टैक्सी चलाने की सलाह दे रहे हैं।
भारत टैक्सी सेवा और चुनाव की पृष्ठभूमि
यह पूरा विवाद उत्तर प्रदेश में 'भारत टैक्सी' नामक राइड-हेलिंग सेवाओं के आधिकारिक शुभारंभ के दौरान सामने आया था। इस सहकारी पहल को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए स्व-रोजगार के नए अवसर सुनिश्चित करना था। मंच से बोलते हुए उपमुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि जिन युवाओं के पास वाहन चलाने का हुनर है उन्हें मोटर वाहन चलाना चाहिए। उन्होंने ड्राइवरों और उपस्थित लोगों को यह भी सलाह दी कि वे अपने घर के पास की ही आखिरी सवारी चुनें। उनका यह तर्क था कि ऐसा करने से उन्हें खाने, आराम करने और अपने बच्चों के साथ दो घंटे बिताने का पर्याप्त समय मिल जाएगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इसके बाद वे रात के 10 बजे तक दोबारा काम कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त आय के लिए केवल दो फेरे और पूरे कर सकते हैं। वर्तमान में राज्य की राजनीति का परिदृश्य बहुत गर्म है क्योंकि विधानसभा चुनावों में अब केवल चार महीने से थोड़ा ही समय शेष बचा है। ऐसे माहौल में रोजगार और युवाओं की अधूरी आकांक्षाएं सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनती जा रही हैं। विभिन्न विपक्षी दल पहले से ही भर्ती परीक्षाओं के परिणामों में देरी और कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर रहे छात्र समूहों का समर्थन कर रहे हैं। इस ताजा बयान के सामने आने के बाद बेरोजगार युवाओं और छात्रों का यह गुस्सा और अधिक मुखर होने की संभावना जताई जा रही है।