प्रचारक की पिटाई पर राजनीतिक बयानबाजी
राजधानी के नरैना थाने में एक आरएसएस प्रचारक के साथ पुलिस द्वारा मारपीट की घटना सामने आई है। इस मामले को लेकर बारां में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख गोविंद सिंह डोटासरा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पुलिस ने प्रचारक के साथ वही कार्रवाई की है जो उनके कार्यक्षेत्र से जुड़ी होती है। इस घटना के बाद आरोपी पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। डोटासरा ने पुलिस मुख्यालय पहुंचकर महानिदेशक से मुलाकात की थी और पुलिस को राजनीति से दूर रखने की मांग उठाई थी। उन्होंने दावा किया कि पुलिस प्रमुख ने उन्हें आश्वासन दिया है कि बल को राजनीतिक गतिविधियों का हिस्सा नहीं बनने दिया जाएगा। हालांकि इस बात को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या राजनेता पुलिस को राजनीति में शामिल होने से रोक पाएंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है और विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। आम जनता के बीच भी इस बात की चर्चा है कि पुलिस और प्रशासन के स्तर पर इस तरह के मामलों से व्यवस्था किस प्रकार प्रभावित हो रही है।
कोटा में सफाई अभियान और भरतपुर में बत्ती गुल
कोटा शहर की सड़कों पर सुबह-सुबह अनूठी हलचल देखने को मिली जहां नगर निगम की मेयर के नेतृत्व में महिला पार्षदों ने झाड़ू लेकर स्वच्छता अभियान चलाया। पूर्व निर्धारित इस कार्यक्रम के तहत चुनी हुई सड़कों पर सफाई की गई और कचरा हाथ ठेले में डाला गया। मेयर ने इस दौरान गीत गाते हुए कहा कि राम बारात निकलने वाली है और राम के आगमन पर अंगना सजाने के भाव से उन्होंने यह सड़कें चमाचम की हैं। इस दौरान स्थानीय पत्रकार और नागरिक भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे जिससे स्वच्छता कार्य को लेकर उत्साह बना रहा। दूसरी ओर भरतपुर नगर निगम में एक अलग ही नजारा देखने को मिला जहां नवनिर्वाचित मेयर की अध्यक्षता में चल रही बैठक के दौरान अचानक बिजली चली गई। बिजली कट जाने के कारण हॉल में अंधेरा छा गया और उपस्थित पार्षदों ने स्थिति को संभालते हुए अपने मोबाइल फोन की टॉर्च जला ली। मोबाइल की रोशनी के बीच ही मेयर ने अपना संबोधन जारी रखा और शहर को गंदगी, अतिक्रमण तथा अंधकार से मुक्ति दिलाने का संकल्प दोहराया। इन दोनों घटनाओं ने स्थानीय निकायों के कामकाज और वहां की व्यवस्थाओं को एक बार फिर से सुर्खियों में ला दिया है। प्रशासनिक बैठकों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर भी लोगों का ध्यान केंद्रित हुआ है।
ओसियां में जुबानी जंग और राजधानी में हंगामा
जोधपुर के ओसियां क्षेत्र के संतोड़ा खुर्द गांव में आयोजित एक धन्यवाद सभा के दौरान विधायक भैराराम सियोल ने पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा और उनकी माता पर कड़े राजनीतिक हमले किए। निवर्तमान सरपंच ओमाराम चौधरी द्वारा आयोजित इस सभा में विधायक ने कहा कि गांव में रहने से उन्हें लोगों के चेहरे और नाम अच्छी तरह याद हैं तथा पूर्व में विकास कार्यों में बाधा डाली गई थी। उन्होंने मंच से चुनौती देते हुए कहा कि यदि हिम्मत है तो जिला परिषद की सीटों पर चुनाव लड़कर दिखाएं। इस बयान के बाद पूर्व विधायक ने भी पलटवार करते हुए कहा कि उनके पास सत्ता नहीं बल्कि जनता का समर्थन है। उधर राजधानी जयपुर में चुनाव के बाद नगर निगम के तीन वार्डों के प्रतिनिधि जोन उपायुक्त के कार्यालय जा पहुंचे और जमकर हंगामा किया। वार्ड 138 की पार्षद दीपिका उपायुक्त की गाड़ी के आगे धरने पर बैठ गईं जबकि उनके पति विजेंद्र ने अधिकारियों को खरी-खरी सुनाई। उनका आरोप था कि विपक्षी दलों से जीतने के कारण उनके वार्डों में सफाई नहीं हो रही है और कर्मचारियों को हटा दिया गया है। उपायुक्त संतलाल ने शांत स्वर में जवाब देते हुए कहा कि कर्मचारियों का तबादला एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है और पार्षदों के बीच आपसी फूट के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इस तरह के विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक सरगर्मी ने स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक मशीनरी की कार्यप्रणाली को प्रभावित किया है।