पश्चिम चंपारण में भाजपा विधायक का प्रशासन के खिलाफ धरना
बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच राजनीतिक गलियारों में उस समय खलबली मच गई जब पश्चिम चंपारण जिले में भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक ने सीधे तौर पर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। लौरिया विधानसभा क्षेत्र से आने वाले भाजपा विधायक विनय बिहारी ने जमीन पर गमछा बिछाकर सार्वजनिक रूप से धरना शुरू कर दिया। उनका यह कड़ा तेवर मुख्यमंत्री के आने तक जारी रहने की बात कही गई। विधायक ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में चलाए जा रहे राहत और बचाव कार्यों की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने अपने क्षेत्र को आधिकारिक रूप से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र घोषित करने की मांग उठाई। इसके अलावा लौरिया क्षेत्र के लिए पर्याप्त नावों, राहत सामग्री के पैकेट, सामुदायिक रसोई शुरू करने और मवेशियों के लिए पशुचारे की पुख्ता व्यवस्था करने जैसी जरूरी मांगें रखी गईं। विधायक ने स्पष्ट रूप से यह बात कही कि उन्हें स्थानीय प्रशासन पर कोई भरोसा नहीं बचा है। सत्ताधारी दल के किसी जनप्रतिनिधि द्वारा अपनी ही सरकार के तंत्र के खिलाफ इस तरह सार्वजनिक रूप से सड़क पर उतरकर विरोध जताना राजनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री के पश्चिमी चंपारण दौरे के दौरान तटबंधों को मजबूत करने की घोषणाएं भी की गईं, लेकिन विधायक का यह कदम सरकार के भीतर चल रही अंदरूनी नाराजगी को पूरी तरह उजागर कर गया है।
कानून व्यवस्था और पुलिस वाहनों की खरीद पर खड़े हुए नए सवाल
एक तरफ जहां सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही से नाराज नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर भी तीखे सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में पटना शहर के भीतर कोचिंग से वापस लौट रही एक १५ वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ और मारपीट की गंभीर घटना सामने आई थी। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज किया और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्ध आरोपियों की पहचान करने का दावा किया। इन तमाम घटनाओं के बीच एनडीए गठबंधन के प्रमुख सहयोगी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी पहले ही सरकार के सामने वक्त रहते कड़ी कार्रवाई करने की पुरजोर मांग रखी थी। उन्होंने सार्वजनिक मंचों से राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर अपनी गहरी चिंता जाहिर की थी। इन सबके बीच सम्राट चौधरी सरकार की कैबिनेट ने कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के नाम पर कुल ११६ नए आधुनिक वाहन खरीदने के प्रस्ताव को भारी भरकम बजट के साथ मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत कुल ६२.५२ करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इन पैसों से ३० वॉटर कैनन गाड़ियां खरीदी जा रही हैं जिन पर २६.४० करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा ८६ वङ्का वाहन खरीदे जा रहे हैं जिन पर ३६.१२ करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का यह तर्क है कि इन वाहनों का इस्तेमाल प्रदर्शनों, दंगों, राजनीतिक रैलियों, त्योहारों, जमीन विवादों और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए किया जाएगा। हालांकि इन सबके बीच बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या पुलिस के पास भीड़ भगाने वाले वॉटर कैनन और दंगा रोकने वाले वङ्का वाहन होने मात्र से बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो जाएगी। सड़क और बाजार में चलने वाली आम बेटियों को सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए पुलिस की जमीनी मुस्तैदी और संवेदनशीलता की जरूरत है।
कारोबारी से पचास लाख की रंगदारी ने खोली सुरक्षा की पोल
बिहार सरकार राज्य में उद्योग धंधे बढ़ाने और व्यापारिक माहौल को बेहतर करने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन अपराधियों की गतिविधियां इन सभी दावों की पोल खोलती नजर आ रही हैं। हाल ही में एक स्थानीय कारोबारी से पचास लाख रुपये की बड़ी रंगदारी मांगने का ताजा मामला सामने आया है। इस घटना के बाद से पूरे व्यापारी वर्ग की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है। सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह है कि यदि किसी उद्यमी या व्यापारी से इतनी बड़ी रकम की रंगदारी मांगी जा रही है, तो क्या अपराधियों के मन में पुलिस और कानून का खौफ पूरी तरह से खत्म हो चुका है। पीड़ित शिकायतकर्ता की ओर से यह आरोप लगाया गया है कि उसे लगातार डराया धमकाया जा रहा है। रंगदारी के ऐसे मामलों में केवल मांगी गई भारी-भरकम रकम ही चिंता का विषय नहीं होती है, बल्कि यह भी देखना होता है कि आखिर इन अपराधियों को पीड़ित तक पहुंचने और दबाव बनाने का दुस्साहस कहां से मिल रहा है। यदि सूबे के व्यापारी वर्ग को सुरक्षित कारोबार करने का भरोसा नहीं मिलेगा, तो निवेश और रोजगार के तमाम राजनीतिक दावे धरे के धरे रह जाएंगे। घटनाओं के बाद केवल एफआईआर दर्ज कर औपचारिकता पूरी कर लेना और कुछ गिरफ्तारियां कर लेना ही काफी नहीं माना जा रहा है। जरूरत इस बात की है कि पुलिस ऐसे अपराधी सिंडिकेट और रंगदारी नेटवर्कों के खिलाफ बहुत कड़ी और प्रभावी कार्रवाई करे ताकि कानून का डर अपराधियों में पहले से ही दिखाई दे सके।