उज्जैन से अयोध्या तक होगी पदयात्रा की शुरुआत
मध्य प्रदेश की राजनीतिक गलियारों में उस समय सरगर्मी तेज हो गई जब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की ओर से एक बड़े पैदल अभियान का खाका सामने आया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस पूरी मुहिम को शिवधाम से रामधाम के मार्ग पर संचालित किया जाएगा। इस आयोजन के लिए आयोजकों द्वारा सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा नाम तय किया गया है। यात्रा के रूट और उसकी कार्ययोजना को लेकर प्रारंभिक विवरण सामने आ चुके हैं जिसके तहत कुल दूरी लगभग नौ सौ तीस किलोमीटर तक तय की जाएगी। मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर से शुरू होकर यह पैदल काफिला उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थल तक अपनी मंजिल तय करेगा। इस राजनीतिक व धार्मिक यात्रा के दो चरण तय किए गए हैं जिनमें पहला हिस्सा दशहरा और दीपावली के बीच के अंतराल में निकाला जाना प्रस्तावित है। इस पहले चरण के समापन के लिए पांच नवंबर की तारीख निर्धारित की गई है। हालांकि यात्रा के इस पूरे कार्यक्रम को लेकर अभी विस्तृत मार्ग तय किया जाना बाकी है और विभिन्न पड़ावों तथा आधिकारिक कार्यक्रमों की अंतिम पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है ताकि पूरी रूपरेखा स्पष्ट हो सके।
यात्रा के एजेंडे में शामिल किए गए कई राजनीतिक मुद्दे
इस पैदल अभियान के दौरान केवल धार्मिक यात्रा तक ही सीमित रहने के बजाय कई तीखे राजनीतिक और प्रशासनिक विषयों को भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। सामने आए विवरण के अनुसार इस सफर में राम मंदिर निर्माण के दौरान चंदे में गड़बड़ी या कथित चंदा चोरी का विषय विशेष रूप से उठाया जाएगा। इसके अलावा मतदाताओं की सूचियों से जुड़ा वोट चोरी का मसला और देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त यानी सीईसी के इस्तीफे की मांग को भी इस एजेंडे में शामिल किया गया है। निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी भूमिका पर भी सवाल खड़े किए जाने की बात कही जा रही है। इन तमाम विषयों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस से जुड़े मुद्दों को भी इस यात्रा के मंच से उठाने की पूरी तैयारी बताई गई है। इन तमाम संवेदनशील और तीखे मुद्दों को इस पदयात्रा के दौरान बार-बार रेखांकित किया जाएगा ताकि राजनीतिक हलकों में इस पर व्यापक चर्चा हो सके। यात्रा के इन सभी एजेंडों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बयानों का दौर शुरू होने की पूरी संभावना है क्योंकि इसमें सीधे तौर पर कई केंद्रीय और संस्थागत विषयों को उठाया जा रहा है। इस पूरी यात्रा का खाका तैयार करते समय आयोजकों ने धार्मिक भावनाओं के साथ-साथ तीखे सियासी सवालों को भी एक साथ साधने की रणनीति बनाई है।
मध्य प्रदेश की सियासत पर पड़ेगा इस अभियान का असर
पूर्व मुख्यमंत्री के इस बड़े अभियान के ऐलान के बाद से ही मध्य प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में सुगबुगाहट काफी तेज हो गई है। राज्य के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी लंबी दूरी की पदयात्रा और उसमें उठाए जाने वाले गंभीर राजनीतिक मुद्दे आने वाले दिनों में बड़ा असर छोड़ सकते हैं। हालांकि इस पूरी यात्रा के आयोजन और इसकी आधिकारिक शुरुआत की तारीखों को लेकर अभी प्रशासनिक या आधिकारिक स्तर पर पूरी तरह से सत्यापित किए जाने की आवश्यकता बताई गई है। राजनीतिक जानकारों का यह भी कहना है कि इस तरह के आयोजनों के विस्तृत कार्यक्रम और आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि होने के बाद ही इसकी अंतिम सफलता का आकलन किया जा सकता है। वर्तमान में जिस प्रकार के विषय इस पैदल यात्रा के एजेंडे में रखे गए हैं उससे साफ है कि आने वाले हफ्तों में राज्य की राजनीति में इन मुद्दों को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है। आम नागरिकों और राजनीतिक प्रेक्षकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस पदयात्रा का अंतिम मार्ग और पड़ाव किस प्रकार तय होते हैं।