संभल सीट पर सपा का पुराना दबदबा
संभल विधानसभा क्षेत्र लंबे वक्त से समाजवादी पार्टी का बेहद सुरक्षित और मजबूत चुनावी आधार रहा है। इस निर्वाचन क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के नेता इकबाल महमूद विधायक के रूप में कुल सात बार विधानसभा के अंदर जा चुके हैं। पिछले विधानसभा चुनाव यानी वर्ष 2022 के दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार राजेश सिंघल को चुनावी मैदान में मात दी थी। इस राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण यह क्षेत्र समाजवादी पार्टी के लिए अपनी पारंपरिक ताकत का प्रतीक माना जाता है। लेकिन अब असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम की तरफ से राजनीतिक सक्रियता काफी तेज कर दी गई है। इस नई पार्टी का इस क्षेत्र में तेजी से सक्रिय होना समाजवादी पार्टी के लिए आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। हालांकि इस प्रकार की शुरुआती गतिविधियों को सीधे तौर पर चुनावी सफलता का प्रमाण मान लेना अभी जल्दबाजी होगी। इसके बावजूद इस प्रकार के राजनीतिक घटनाक्रम से क्षेत्र का पारंपरिक चुनावी गणित पूरी तरह से प्रभावित हो रहा है और सभी दलों की रणनीतियों पर इसका गहरा असर पड़ रहा है।
एआईएमआईएम में शामिल होने वाले नए दावेदार
एआईएमआईएम की स्थानीय रणनीति पर इस समय राजनीतिक विश्लेषकों की पैनी नजर बनी हुई है। जामा मस्जिद के सदर जफर अली ने हाल ही में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी का दामन थाम लिया है। पार्टी में शामिल होने के साथ ही उन्होंने आगामी चुनावों में अपनी उम्मीदवारी पेश करने की इच्छा भी खुलकर जता दी है। जानकारी के सामने आई है कि जफर अली पूर्व में हुए हिंसा के एक मामले के सिलसिले में जेल की यात्रा भी कर चुके हैं और अब उन्हें पार्टी टिकट का एक मजबूत दावेदार माना जा रहा है। जफर अली के अलावा शकील अहमद की तरफ से भी अपनी राजनीतिक और चुनावी महत्वाकांक्षाओं को सार्वजनिक रूप से सामने लाया गया है। इन तमाम घटनाक्रमों के बीच पार्टी के भीतर सही और मजबूत प्रत्याशी का चयन करना नेतृत्व के लिए सबसे अहम काम बन गया है। इस निर्वाचन क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या और भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। जब समाजवादी पार्टी और एआईएमआईएम दोनों एक ही चुनावी जमीन पर आमने-सामने होंगे, तब वोटों का बंटवारा होना स्वाभाविक है। यदि एआईएमआईएम पार्टी को स्थानीय स्तर पर पर्याप्त समर्थन हासिल हो जाता है, तो जीत और हार के सारे पुराने समीकरण पूरी तरह से बदल जाएंगे। नगरपालिका की मौजूदा चेयरमैन आसिया मुशीर भी इसी पार्टी से ताल्लुक रखती हैं, जिससे जमीन पर इनकी स्थिति मजबूत दिखती है।
हिंसा के बाद उभरे नए राजनीतिक मुद्दे
स्थानीय राजनीति में कई नए और तीखे मुद्दे पिछले साल हुए एक बड़े घटनाक्रम के बाद अचानक सतह पर आ गए। ठीक तारीख की बात करें तो 24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद के सर्वे का कार्य चल रहा था और उसी दौरान वहां भारी हिंसा भड़क उठी थी। उस हिंसा की घटना के बाद संभल शहर की राजनीति में लगातार कई नए और संवेदनशील सवाल खड़े हो गए हैं। हिंसा के दौरान मारे गए दुर्भाग्यपूर्ण पीड़ितों के परिजनों से मिलने और उनकी कानूनी पैरवी करने के विषय को लेकर नेताओं में होड़ मच गई। समाजवादी पार्टी के विधायक इकबाल महमूद तथा नगर पालिका अध्यक्ष आसिया मुशीर के पति मुशीर खां के बीच इस दौरान तीखी बयानबाजी देखने को मिली। इस आपसी जुबानी जंग को प्रभावित परिवारों के बीच जाकर अपनी सक्रियता और राजनीतिक पकड़ दिखाने की एक खुली प्रतिस्पर्धा के रूप में देखा गया। भारतीय जनता पार्टी की चुनावी संभावनाओं पर इस पूरे घटनाक्रम का क्या और कितना असर पड़ेगा, यह पूरी तरह से उम्मीदवारों के चयन, स्थानीय स्तर के असल मुद्दों और मतदाताओं के रुख पर निर्भर करेगा। संभल की इस बदलती हुई राजनीतिक हवा में हर दल अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है और आने वाले दिनों में यहां का मुकाबला काफी दिलचस्प और कड़ा होने की पूरी उम्मीद है।