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राजनीति

राजनीतिक जुबानी जंग: अमित शाह के बयान पर रामजी गौतम का पलटवार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक हालिया बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता रामजी गौतम ने तीखा पलटवार करते हुए सत्ताधारी दल पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस राजनीतिक जुबानी जंग से राज्य का सियासी पारा काफी चढ़ गया है।

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Ankit Yadav
26 सित 2026, 13:41
राजनीतिक जुबानी जंग: अमित शाह के बयान पर रामजी गौतम का पलटवार

अमित शाह के बयान पर बसपा नेता का तीखा प्रहार उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयानों का दौर पूरी तरह से गर्म हो चुका है और हर एक दल अपने विरोधी पर सियासी तीर छोड़ने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं दे रहा है। इसी सिलसिले में देश के गृह मंत्री अमित शाह के द्वारा दिए गए एक बयान के ऊपर बहुजन समाज पार्टी के प्रमुख नेता रामजी गौतम ने कड़ा ऐतराज जताते हुए जोरदार पलटवार किया है। रामजी गौतम ने अपने बयान में दावा किया कि जब प्रदेश के अंदर बहुजन समाज पार्टी की सरकार थी, उस दौरान शासन व्यवस्था पूरी तरह से चुस्त और दुरुस्त थी तथा समाज विरोधी तत्वों द्वारा वसूले जाने वाले अवैध गुंडा टैक्स पर पूरी तरह से नकेल कस दी गई थी। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि मौजूदा भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में सूबे के भीतर स्थिति बिल्कुल उलट हो चुकी है और यहाँ रोजगार तथा परीक्षाओं की पारदर्शी व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। इस बयान के सामने आने के बाद से राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार पूरी तरह से गर्म हो गया है और दोनों दलों के समर्थकों के बीच वैचारिक टकराव लगातार बढ़ता ही जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी अधिक तूल पकड़ सकता है क्योंकि दोनों ही दल एक दूसरे को घेरने का कोई भी अवसर छोड़ना नहीं चाहते हैं और जनता के बीच अपनी अपनी उपलब्धियों का ढोल पीट रहे हैं।

परीक्षाओं की व्यवस्था और पेपर लीक पर गंभीर आरोप भारतीय राजनीति में रोजगार और प्रशासनिक परीक्षाओं का मुद्दा हमेशा से ही सबसे संवेदनशील और बड़ा विषय रहा है क्योंकि इससे सीधे तौर पर देश के युवाओं और छात्रों का भविष्य जुड़ा होता है। बहुजन समाज पार्टी के नेता रामजी गौतम ने अपने इस हालिया बयान के दौरान सीधे तौर पर मौजूदा सरकार की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के भीतर पेपर लीक होना एक बड़ा उद्योग बनता जा रहा है, जिससे राज्य के लाखों मेहनतकश और योग्य युवाओं के सपनों पर पानी फिर रहा है। जब भी किसी बड़ी भर्ती परीक्षा का आयोजन किया जाता है, तो किसी न किसी स्तर पर लापरवाही या पेपर आउट होने की खबरें सामने आ ही जाती हैं, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े होने लगते हैं। विपक्षी दलों का यह लगातार यह प्रयास रहता है कि वे इस प्रकार के संवेदनशील मुद्दों को जोर-शोर से उठाएं ताकि सरकार की प्रशासनिक विफलता को जनता के सामने बेनकाब किया जा सके। दूसरी तरफ, सत्ताधारी पार्टी के नेता और प्रवक्ता इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए यह दावा करते हैं कि उनकी सरकार ने नकल माफियाओं और अपराधियों के खिलाफ अब तक की सबसे कड़ी कार्रवाई की है। इस तरह के दावों और प्रतिदावों के बीच आम जनता और विशेषकर युवा वर्ग असमंजस की स्थिति में फंसा हुआ नजर आता है क्योंकि उन्हें केवल वादों के अलावा धरातल पर पुख्ता बदलाव की उम्मीद रहती है जो कई बार पूरी होती नहीं दिखती है।

आगामी चुनावों से पहले सियासी सरगर्मी और प्रतिक्रियाएं किसी भी राज्य में जब इस तरह के बड़े राजनीतिक बयान सामने आते हैं, तो उसके दूरगामी परिणाम चुनावी समीकरणों पर पड़ना पूरी तरह से तय माने जाते हैं। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य में हर छोटी बड़ी घटना पर राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की पैनी नजर बनी रहती है। बहुजन समाज पार्टी अपने खोए हुए राजनीतिक जनाधार को वापस पाने के लिए लगातार संघर्ष कर रही है और इसके लिए वह दलितों, पिछड़ों तथा युवाओं के मुद्दों को आक्रामकता के साथ उठा रही है। रामजी गौतम का यह बयान उसी रणनीति का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है जिसके जरिए पार्टी यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वही एकमात्र ऐसा विकल्प है जो जनता को भयमुक्त और पारदर्शी शासन दे सकता है। दूसरी तरफ, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी इन तमाम हमलों का जवाब देने के लिए अपनी विकास योजनाओं और कानून व्यवस्था की उपलब्धियों का खुलकर बखान कर रही है। आने वाले समय में जैसे जैसे चुनावी परिस्थितियां आकार लेंगी, वैसे वैसे इस प्रकार के मुद्दों पर बहस और अधिक तीखी होने की पूरी संभावना है। राजनीतिक दलों के बीच चल रही यह बयानबाजी अंततः जनता के बीच जाकर ही तय होगी कि मतदाता किस पार्टी की नीतियों और बयानों पर अपना भरोसा जताते हैं और किसे पूरी तरह से नकार देते हैं।

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