साठ साल के राजनीतिक अनुभव के बावजूद उपेक्षा का दर्द भारतीय राजनीति के दिग्गज चेहरों में गिने जाने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हाल ही में सार्वजनिक मंच पर अपनी वर्तमान राजनीतिक स्थिति को लेकर खुलकर बात की है और पार्टी के भीतर अपनी अनदेखी का दर्द बयां किया है। उन्होंने मीडिया के सामने अपने लंबे राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि उनके पास पंजाब की राजनीति का साठ वर्षों का लंबा और विस्तृत अनुभव मौजूद है, लेकिन मौजूदा समय में हालात ऐसे बन चुके हैं कि कोई उनकी सुध तक नहीं लेता है। उनके इस तीखे बयान से यह साफ जाहिर होता है कि वे सत्ताधारी दल के भीतर अपनी वर्तमान भूमिका और महत्व को लेकर काफी आहत महसूस कर रहे हैं। राज्य की राजनीति में कभी एकछत्र राज करने वाले और अपनी शर्तों पर फैसले लेने वाले इस वरिष्ठ नेता का इस तरह से अपनी ही पार्टी पर सवाल उठाना कई तरह के राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा करता है। उनके इस दर्द भरे बयान के बाद से ही विपक्षी दलों के साथ-साथ उनके अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर भी तमाम तरह की अटकलों का बाजार गर्म हो गया है और हर कोई उनके अगले कदम का इंतजार कर रहा है।
कांग्रेस से अलगाव और भगवा दल के साथ नया सियासी अध्याय कैप्टन अमरिंदर सिंह के राजनीतिक सफर पर नजर डाली जाए तो उन्होंने अपने लंबे करियर का अधिकांश हिस्सा कांग्रेस पार्टी के साथ बिताया और वे लंबे समय तक राज्य के मुख्यमंत्री पद की कमान संभालते रहे। अपनी मजबूत प्रशासनिक पकड़ और क्षेत्र में दबदबे के कारण उन्हें पंजाब के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता था, लेकिन कुछ साल पहले आंतरिक कलह और नेतृत्व के साथ मतभेदों के चलते उन्हें अपनी पुरानी पार्टी छोड़कर बाहर आना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी का गठन किया और बाद में अपनी पार्टी का विलय भारतीय जनता पार्टी के साथ कर लिया ताकि राष्ट्रीय स्तर पर और राज्य में एक नई राजनीतिक पारी की शुरुआत की जा सके। उस समय यह उम्मीद जताई जा रही थी कि उनके आने से पार्टी को राज्य में मजबूती मिलेगी और उन्हें भी एक बड़ा सम्मानजनक मंच प्राप्त होगा, जिससे वे अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता को और अधिक बनाए रख सकेंगे। हालांकि, समय बीतने के साथ ही राज्य की जमीनी राजनीति में जैसी अपेक्षाएं थीं, वैसी सफलता या सक्रिय भूमिका शायद उन्हें नहीं मिल पाई, जिसके कारण उनके मन में यह निराशा घर कर गई है और उन्होंने खुलकर अपनी इस पीड़ा को मीडिया के माध्यम से जनता के सामने रख दिया है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा इस प्रकार के बयान सामने आने के बाद से ही पंजाब के राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी काफी तेज हो गई है और सभी राजनीतिक दल इस घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि एक अनुभवी नेता का इस तरह से अपनी ही पार्टी से मोहभंग होना और सार्वजनिक रूप से अपनी उपेक्षा की बात कहना आने वाले समय में बड़े राजनीतिक फेरबदल का संकेत दे सकता है। आगामी चुनावों और संगठनात्मक बैठकों से पहले इस तरह के बयानों से पार्टी के भीतर असहजता पैदा होना स्वाभाविक है, क्योंकि इससे कार्यकर्ताओं के बीच भी गलत संदेश जा सकता है। पार्टी हाईकमान और स्थानीय नेतृत्व के लिए यह एक आत्मविश्लेषण का विषय बन गया है कि वे अपने वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को कैसे साथ लेकर चलें और उनकी क्षमताओं का उचित उपयोग करें। हालांकि अभी यह देखना बाकी है कि इस बयान के बाद पार्टी के शीर्ष नेता उनसे संपर्क साधते हैं या कोई डैमेज कंट्रोल की कोशिश की जाती है, लेकिन इतना तय है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस कदम ने राज्य की राजनीति में एक बार फिर से गर्माहट ला दी है और उनके समर्थकों में भी चिंता की लहर दौड़ गई है।