"प्रस्तावित बैठक स्थगित की गई
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े द्वारा मुख्यालय पर एक महत्वपूर्ण सभा का आयोजन तय किया गया था। यह आयोजन आगामी 14 अक्टूबर को निर्धारित किया गया था जिसमें पासी समुदाय के सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों तथा संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों को आमंत्रित किया जाना था। हालांकि किसी कारणवश इस निर्धारित कार्यक्रम को फिलहाल टाल दिया गया है और अब यह सभा आने वाले सप्ताह में आयोजित की जाएगी। पार्टी संगठन के उच्च स्तर पर इस समुदाय के लोगों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है ताकि चुनावों से पहले सांगठनिक पकड़ को और अधिक मजबूत किया जा सके। इस आगामी बैठक के माध्यम से पार्टी के शीर्ष नेता समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ सीधा संपर्क साधेंगे और चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देने पर गंभीरता से विचार-विमर्श करेंगे।
सांगठनिक प्रतिनिधित्व और असंतोष
दलित वर्ग के भीतर जाटव आबादी के बाद पासी समुदाय का जनसांख्यिकीय आकार सबसे बड़ा है जो चुनाव के लिहाज से बहुत अहम है। राजनीतिक प्रभाव की दृष्टि से अवध, गोरखपुर, कानपुर तथा काशी क्षेत्रों में इस समुदाय की घनी आबादी निवास करती है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि यह प्रभावशाली समूह प्रदेश की कुल पचासी सीटों पर सीधे तौर पर चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। इसके अलावा लगभग डेढ़ सौ सीटों पर भी इस वर्ग का खासा असर देखा जाता है। राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने के उद्देश्य से पार्टी ने हाल ही में प्रियंका रावत को उच्च सदन यानी राज्यसभा भेजकर पासी समाज के बीच अपनी पैठ गहरी करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया था। इसके साथ ही पिछले दिनों पार्टी ने कृष्णा पासवान को राज्य सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी थी। सांगठनिक स्तर पर भी संतुलन साधते हुए अशोक रावत, उपेंद्र रावत और प्रियंका रावत को प्रमुख पदों की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि इन तमाम प्रयासों के बावजूद पार्टी के भीतर कौशल किशोर की नाराजगी अब भी संगठन के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है।
सांसदों का गणित और राजनीतिक समीकरण
संसदीय प्रतिनिधित्व की बात करें तो सत्ताधारी दल के पास इस समुदाय से ताल्लुक रखने वाले तीन सांसद मौजूद हैं जिनमें जयप्रकाश रावत, अशोक रावत और कमलेश पासवान के नाम शामिल हैं। इसके विपरीत मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के पास इस समाज के पांच सांसद संसद में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जिनमें आरके चौधरी, प्रिया सरोज, दारोगा प्रसाद सरोज, पुष्पेंद्र सरोज और अवधेश प्रसाद शामिल हैं। फैजाबाद से लोकसभा सांसद अवधेश प्रसाद को आगे करके विपक्षी दल प्रदेश की राजनीति में एक बहुत बड़ा राजनीतिक संदेश प्रेषित कर रहा है। इसके अलावा विपक्षी दल ने इंद्रजीत सरोज, आरके चौधरी, पुष्पेंद्र सरोज और प्रिया सरोज जैसे नेताओं को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। अतीत के चुनावों यानी 2014, 2017, 2019 और 2022 के राजनीतिक दौर में सत्ताधारी दल ने गैर जाटव दलित राजनीति का बेहद सफल प्रयोग किया था। लेकिन हालिया 2024 के आम चुनावों में विपक्षी दल के पीडीए फॉर्मूले ने सत्ताधारी खेमे के सामने गंभीर खतरे की घंटी बजा दी है। यही वजह है कि अब सत्ताधारी दल एक बार फिर पासी समाज के साथ अपने पुराने संबंधों के तारों को कसने और मजबूती देने की कवायद में पूरी ताकत से जुट गया है।