Lucknow Desk : बलिया के सिकंदरपुर क्षेत्र के गोसाईंपुर गांव में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ के बीच माहौल गमगीन रहा। लोगों ने नम आंखों से अपने नेता को अंतिम विदाई दी। रामगोविंद चौधरी के निधन के बाद उनके बेटे रंजीत चौधरी ने पहली बार मीडिया से बातचीत की। उन्होंने अपने पिता के राजनीतिक जीवन, समाजवादी विचारधारा और परिवार से जुड़े कई पहलुओं को याद किया। रंजीत ने कहा कि उनके पिता की पूरी जिंदगी समाजवाद और राजनीति के लिए समर्पित रही। इस समय उनके पास कहने के लिए बहुत कुछ है, लेकिन अभी वह सिर्फ अपने पिता को याद करना चाहते हैं।
रंजीत चौधरी ने कहा कि रामगोविंद चौधरी बेहद सादगीपूर्ण जीवन जीते थे। कई बार विधायक और नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहने के बावजूद वह बलिया में किराये के मकान में रहे। उन्होंने परिवार से ज्यादा समाज, क्षेत्र और अपने राजनीतिक साथियों को महत्व दिया। उन्होंने अपने पिता के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के साथ लंबे राजनीतिक संबंधों को भी याद किया। रंजीत के मुताबिक, रामगोविंद चौधरी लंबे समय तक चंद्रशेखर के साथ मजबूती से खड़े रहे। बाद में उनके मुलायम सिंह यादव के साथ भी गहरे राजनीतिक और पारिवारिक संबंध बने। इसके बाद वह समाजवादी पार्टी के साथ सक्रिय रूप से जुड़े। रंजीत ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में जब उनके पिता की तबीयत खराब थी, तब समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव की ओर से परिवार को लगातार सहयोग मिला।
उन्होंने अखिलेश यादव की ओर से पिता के निधन पर जताई गई संवेदना का भी जिक्र किया। 2027 के सवाल पर रंजीत ने नहीं की राजनीतिक घोषणा जब रंजीत चौधरी से 2027 विधानसभा चुनाव और पिता के अधूरे सपनों को पूरा करने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कोई राजनीतिक घोषणा नहीं की। उन्होंने कहा कि अभी इस बारे में बात करने का समय नहीं है। फिलहाल पूरा परिवार अपने पिता को खोने के दुख से गुजर रहा है। रंजीत ने परिवार में हाल के दिनों में हुए लगातार दो बड़े दुखों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में पार्टी और जनता का साथ परिवार के लिए बड़ी ताकत है। उन्होंने भरोसा जताया कि सभी के सहयोग से परिवार धीरे-धीरे इस दुख से बाहर आएगा।