चुनावी मैदान में प्रभारियों और एजेंटों की तैनाती समाजवादी पार्टी द्वारा लखनऊ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के आगामी चुनाव के मद्देनजर एक बड़ी और व्यापक प्रशासनिक तथा सांगठनिक रणनीति तैयार की गई है। इस रणनीति के तहत पार्टी ने विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान अपनाए जाने वाले पारंपरिक और बेहद प्रभावी तरीकों को इस स्नातक चुनाव में भी लागू करने का निर्णय लिया है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए पार्टी की तरफ से कुल 1720 प्रभारियों और बूथ स्तर के एजेंटों को सीधे तौर पर चुनावी मैदान में उतारने की पुख्ता तैयारी कर ली गई है। इन सभी नियुक्त प्रभारियों और एजेंटों को मतदान प्रक्रिया से लेकर मतदाता सूचियों के प्रबंधन और जमीनी स्तर तक अपनी पकड़ मजबूत करने की विशेष जिम्मेदारी सौंपी जाएगी ताकि हर एक मतदाता तक पार्टी का संदेश और उसकी रणनीति आसानी से पहुंच सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों में इस तरह की सूक्ष्म और विस्तृत तैयारी बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि यहां आम मतदाताओं की बजाय एक विशिष्ट और शिक्षित वर्ग के लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हैं। पार्टी का यह कदम इस बात का स्पष्ट संकेत देता है कि वे इस चुनावी मुकाबले को किसी भी स्तर पर हल्के में नहीं ले रही है और पूरी गंभीरता के साथ अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए हर संभव सांगठनिक प्रयास कर रही है।
पारंपरिक और आधुनिक चुनावी रणनीतियों का मेल विधानसभा और लोकसभा जैसे बड़े आम चुनावों में जिस प्रकार से राजनीतिक दल अपने बूथ अध्यक्षों, सेक्टर प्रभारियों, जोनल प्रभारियों और पोलिंग एजेंटों की एक विशाल फौज मैदान में उतारते हैं, ठीक उसी तर्ज पर अब स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के इस चुनाव में भी सांगठनिक ढांचे को सक्रिय किया जा रहा है। आमतौर पर विधान परिषद यानी एमएलसी के इन चुनावों में राजनीतिक दल उतने बड़े पैमाने पर मैदानी अमले को सक्रिय नहीं करते थे जितना कि वे आम चुनावों में करते हैं। लेकिन समाजवादी पार्टी ने इस बार अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए पूरी ताकत झोंकने का मन बनाया है और 1720 की संख्या में प्रभारियों तथा एजेंटों को जिम्मेदारी सौंपकर अपने इरादे साफ कर दिए हैं। इस पूरी व्यवस्था के पीछे मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्नातक मतदाताओं से सीधा संपर्क साधा जा सके, क्योंकि इस प्रकार के चुनावों में कम मतदान प्रतिशत और विशिष्ट मतदाता सूची के कारण हर एक वोट का बहुत बड़ा महत्व होता है। पार्टी के रणनीतिकार इस बात को भली-भांति समझते हैं कि यदि जमीनी स्तर पर सही प्रबंधन न हो, तो चुनाव के परिणाम मनमुताबिक नहीं आ पाते हैं। इसलिए लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान अपनाए जाने वाले सफल प्रबंधकीय नुस्खों को इस स्नातक खंड चुनाव में भी पूरी सख्ती और योजनाबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है, ताकि पार्टी के पक्ष में माहौल तैयार करने के साथ-साथ मतदान के दिन भी हर बूथ पर पूरी चौकसी बरती जा सके।
राजनीतिक प्रभाव और आगे की चुनावी प्रक्रिया समाजवादी पार्टी द्वारा उठाए गए इस बड़े कदम से उत्तर प्रदेश की राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और अन्य राजनीतिक दलों की निगाहें भी इस तैयारी पर टिकी हुई हैं। स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों में हमेशा से ही विभिन्न दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलता है, क्योंकि यहां जीत-हार का अंतर कई बार बहुत ही कम वोटों का होता है। ऐसे में 1720 प्रभारियों और एजेंटों का यह मजबूत नेटवर्क पार्टी के लिए एक बड़ा सांगठनिक हथियार साबित हो सकता है जो चुनाव के अंतिम परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। इन प्रभारियों को उनके तय क्षेत्रों में भेजकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वे योग्य मतदाताओं का पंजीकरण कराने से लेकर उन्हें मतदान केंद्र तक लाने की पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग करें। इस तरह की जमीनी कवायद से न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरता है बल्कि विरोधियों को भी एक कड़ा राजनीतिक संदेश मिलता है कि पार्टी इस चुनाव को पूरी ताकत और प्रतिबद्धता के साथ लड़ रही है। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आएगी, इस सांगठनिक अमले की सक्रियता और अधिक बढ़ने की संभावना है, जिससे पूरे लखनऊ खंड में राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है और सभी की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि इस रणनीति का जमीनी स्तर पर कितना सकारात्मक परिणाम देखने को मिलता है।