संगठन का पुनर्गठन और नई व्यवस्था बहुजन समाज पार्टी की सर्वोच्च नेत्री मायावती ने आगामी राजनीतिक रणनीतियों को धार देने के उद्देश्य से पार्टी के सांगठनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं जिसके तहत पूरे संगठन को तीन अलग-अलग सेक्टर्स में बांट दिया गया है। इस नई व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह लिया गया है कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील राज्यों की कमान मायावती ने अपने पास ही सुरक्षित रखी है ताकि जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ और अधिक मजबूत बनाई जा सके। पार्टी प्रमुख द्वारा लिया गया यह कदम आंतरिक प्रशासनिक कसावट और चुनावी तैयारियों की दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि इन दोनों राज्यों में बहुजन समाज पार्टी का जनाधार हमेशा से मुख्य फोकस में रहा है और पार्टी किसी भी प्रकार की सांगठनिक चूक से बचना चाहती है। इस प्रकार के फेरबदल से पार्टी के भीतर कैडर आधारित गतिविधियों को गति मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है और स्थानीय स्तर पर नेताओं तथा कार्यकर्ताओं के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण हो सकेगा।
भारी बारिश और आपदा के बीच जनसेवा की अपील संगठन विस्तार के साथ-साथ मायावती ने देश के कई हिस्सों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और उससे उत्पन्न गंभीर हालातों पर भी अपनी गंभीर चिंता सार्वजनिक रूप से व्यक्त की है। खराब मौसम और जलभराव के कारण आम नागरिकों को हो रही भारी परेशानियों के मद्देनजर उन्होंने पार्टी के सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे संकट की इस घड़ी में जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे आएं। मौसम विभाग की चेतावनियों और लगातार बरस रहे पानी के कारण जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है जिसके चलते गरीब बस्तियों और ग्रामीण इलाकों में हालात अधिक चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे समय में राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का यह दायित्व बन जाता है कि वे प्रशासन के साथ तालमेल बिठाकर राहत कार्यों में अपना योगदान दें ताकि प्रभावितों तक समय पर भोजन, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सामग्रियां पहुंचाई जा सकें। पार्टी कार्यकर्ताओं से यह भी अपेक्षा की गई है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्थानीय नागरिकों की हरसंभव सहायता करें और सरकारी स्तर पर मिलने वाली राहत को जरूरतमंदों तक पहुंचाने में पूरी ईमानदारी से सहयोग प्रदान करें।
राजनीतिक प्रभाव और आगामी रणनीतिक दिशा मायावती द्वारा सांगठनिक मोर्चे पर उठाए गए इन कदमों के दूरगामी राजनीतिक परिणाम देखने को मिल सकते हैं क्योंकि पार्टी अब पूरी तरह से चुनावी मोड में नजर आ रही है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का कार्यभार सीधे अपने हाथों में रखने से यह साफ हो जाता है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष किसी भी स्तर पर सांगठनिक ढिलाई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं और हर फैसले पर उनकी पैनी नजर बनी रहेगी। बारिश से प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों के जरिए पार्टी जनता के बीच अपनी सक्रियता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश देने का प्रयास कर रही है जो कि विपक्षी दलों के मुकाबले सांगठनिक जमीन को मजबूत करने में मददगार साबित होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के सांगठनिक फेरबदल से कार्यकर्ताओं में एक नया उत्साह संचारित होगा और वे आगामी राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए अधिक तत्परता से जुट जाएंगे। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि तीन सेक्टर्स में बंटी यह पार्टी किस प्रकार अपनी नई कार्यप्रणाली के जरिए जनता के बीच अपनी पकड़ को और अधिक गहरा करने में सफल हो पाती है।