देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेजी से चल रही हें। इस बार यूपी विधानसभा का चुनाव पिछले चुनावों की तुलना में काफी अलग होने वाला है, क्योंकि इस बार यूपी की सियासत में प्रदेश की प्रमुख पार्टियां भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बहुजनसमाज पार्टी के अलावा ओवैसी की AIMIM ने भी एंट्री ले ली है। ओवैसी की एंट्री से जहां पहले ही PDA नारा लगा रहें सपा प्रमुख अखिलेश यादव को मुस्लिम वोटों के नुकसान का डर सता रहा है। वहीं आज सपा के तीन बागी विधायकों ने उन्हें तगड़ा झटका दे दिया है। सपा से निष्कासित तीन विधायक राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह औऱ विनोद चतुर्वेदी न भारतीय जनता पार्टी का हाथ थाम लिया है। बता दें इनमें एक विधायक ने 2024 के राज्यसभा चुनाव में सपा के खिलाफ क्रॉस वोटिंग कर भाजपा उम्मीदवार को जिताया था। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि सपा के ये तीन विधायक भाजपा के पाले में जाकर किस विधानसभा क्षेत्र से कितना फायदा पहुंचाएंगे और सपा को कितना नुकसान होगा? आज समाजवादी पार्टी के तीन बागी विधायक भाजपा में शामिल हो गए हैं। सपा के तीनों बागी विधायकों के सदस्यता ग्रहण का कार्यक्रम अमेठी में आयोजित हुआ। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और पूर्व सासंद स्मृति ईरानी की मौजूदगी इन विधायकों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। सपा निकाले जाने के बाद भाजपा को ज्वाइन करने वाले इन विधायकों में अमेठी की गौरीगंज विधानसभा सीट से राकेश प्रताप सिंह, अयोध्या की गोसाईंगंज विधानसभा सीट से अभय सिंह और जालौन की काल्पी विधानसभा सीट से विनोद चतुर्वेदी का नाम शामिल हैं। ये तीनों ही विधायक 2022 में सपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इन तीनों के नाम साल 2024 के फरवरी माह में हुए राज्यसभा चुनाव में क्रॉस-वोटिंग को लेकर चर्चा में आया था। राकेश प्रताप सिंह को जून 2025 में सपा से निष्कासित किए जाने की खबरें भी आई थीं। पार्टी के खिलाफ गतिविधियों में शामिल होने के कारण ही सपा ने तीनों विधायकों को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। अब सवाल है ये है कि सपा के बागी तीनों विधायकों के दलबदल का 2027 के विधानसभा चुनाव पर क्या असर पड़ेगा?
भाजपा को इन तीनों क्षेत्रों में स्थानीय पहचान और नेताओं के जनाधार का फायदा मिल सकता है। वहीं, सपा को गौरीगंज, गोसाईंगंज और कालपी सीट में नुकसान की आशंका है। हालांकि, चुनाव में जीत-हार का फैसला टिकट, स्थानीय समीकरण और मतदाताओं के रुख पर निर्भर करेगा। भाजपा में शामिल हुए इन विधायकों को पार्टी टिकट देगी या नहीं, यह भी 2027 से पहले देखने वाली अहम बात होगी। लेकिन इन तीनों विधायकों की। पिछली राजनीतिक पृष्ठिभूमि से यह समझा जा सकता है कि ये तीनों ही विधायक सपा को कितना नुकसान पहुंचाएंगे और भाजपा को कितना फादया होगा। सबसे पहले बात करते हैं अमेठी की गौरीगंज विधानसभा सीट से विधायक राकेश प्रताप सिंह की। राकेश प्रताप सिंह साल 2012 से समाजवादी पार्टी के साथ थे। 2017 सपा के टिकट पर विधायक बने और लगातार तीसरी बार चुनाव जीतकर 2022 में भी विधायक बने। राकेश प्रताप सिंह ने फरवरी 2024 में राज्यसभा चुनाव में सपा से बगावत की थी। राज्यसभा चुनाव में BJP कैंडिडेट को वोट किया था। इसके बाद लगातार इनपर बगावत के आरोप लगते रहें। जून 2025 में सपा ने निष्कासित कर दिया था। पार्टी से निकाले जाने के बाद राकेश प्रताप सिंह ने सपा पर तुष्टिकरण और सनातन के अपमान का आरोप लगाया था और बात करते हैं कि अयोध्या जिले की गोसाईंगंज सीट से विधायक अभय सिंह की। अभय सिंह भी समाजवादी पार्टी के चर्चित नेताओं में शामिल रहें।
2022 के विधानसभा चुनाव में अभय सिंह ने सपा के टिकट पर चुनाव जीता था और विधायक बने थे। उनका नाम पहले भी पार्टी नेतृत्व से मतभेदों और राजनीतिक बयानबाजी को लेकर सुर्खियों में रहा है। उनके पाला बदलने कर भाजपा में जाने के बाद अब अयोध्या की गोसाईंगंज सीट पर असर पड़ सकता है। 2027 के विधानसभा चुनाव में उनकी भूमिका अहम हो सकती है। भाजपा को उनके स्थानीय प्रभाव का फायदा मिल सकता है, जबकि सपा को गोसाईंगंज सीट पर अपना संगठन और समर्थन फिर से मजबूत करने की चुनौती होगी। आज भाजपा ज्वाइन करने वाले तीसरे विधायक हैं जालौन की कालपी विधानसभा सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी। विनोद चतुर्वेदी के बीजेपी में जाने की संभावना को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें पहले से ही लगाई जा रही थी। जालौन की कालपी विधानसभा सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी का राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू होकर समाजवादी पार्टी और अब भाजपा तक पहुंचा है। वे 2007 में कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा पहुंचे थे। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में कालपी सीट जीती और निषाद पार्टी के छोटे सिंह को 2,816 मतों से हराया। 2024 के राज्यसभा चुनाव में क्रॉस-वोटिंग के बाद वे सपा के बागी विधायकों में गिने जाने लगे। आज विनोद चतुर्वेदी ने भी भाजपा में शामिल हो गए हैं। इन तीनों विधायकों के भाजपा में आने से गौरीगंज, गोसाईंगंज और कालपी विधानसभी क्षेत्र में स्थानीय पहचान और मौजूदा जनाधार का जहां भाजपा को बड़ा फायदा हो सकता है तो वहीं सपा इन सीटों पर अपनी ताकत को खो सकती है। इनमें अयोध्या की गोसाईंगंज सीट से विधायक अभय सिंह सपा के मजबूत वोट बैंक रहे हैं। वो लगातार गोईसाईंगंज सीटे से ही तीन बार विधायक चुने गए। ऐसे में भाजपा को इसका बड़ा फायदा मिल सकता है।