राष्ट्रपति भवन में विपक्षी नेताओं का प्रदर्शन
शुक्रवार की शाम को भारत के विभिन्न विपक्षी दलों के दिग्गज नेताओं का एक दल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने उनके आधिकारिक आवास पर पहुंचा। इस बैठक में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खर्गे, ममता बनर्जी, उमर अब्दुल्ला, सुप्रिया सुले, मनोज झा, थोल थिरुमावलवन, एमए बेबी और डी राजा समेत कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं। यह प्रतिनिधिमंडल लगभग 45 मिनट से अधिक समय तक राष्ट्रपति के साथ चर्चा में जुटा रहा। इस दौरान विपक्षी नेताओं ने देश की मौजूदा चुनाव प्रणाली की निष्पक्षता को लेकर अपनी चिंताएं राष्ट्रपति के समक्ष रखीं। विपक्षी दल के सदस्यों ने इस मुलाकात के माध्यम से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया और देश के शीर्ष संवैधानिक पद से हस्तक्षेप की अपेक्षा जताई। बैठक के पश्चात नेताओं ने मीडिया के सामने अपनी बात रखी और राष्ट्रपति के साथ हुई बातचीत के मुख्य बिंदुओं को साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस मामले में राष्ट्रपति की ओर से ठोस कार्रवाई किए जाने की उम्मीद कर रहे हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगे गंभीर आरोप
मुलाकात के बाद कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने कहा कि वे राष्ट्रपति से निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था की बहाली की उम्मीद रखते हैं। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग दोहराई है। विपक्षी नेताओं का सीधा आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मिलकर लोकतंत्र को नष्ट करने की एक सोची-समझी साजिश रची है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को वोट चोरी करने वाला गंभीर कृत्य बताया। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के समक्ष यह दावा किया कि उन्हें इस प्रक्रिया में बड़े स्तर पर अनियमितताएं देखने को मिली हैं। नेताओं ने कहा कि राष्ट्रपति ने उनके तर्कों का खंडन नहीं किया बल्कि उनसे इन आरोपों को साबित करने के लिए ठोस सबूत पेश करने को कहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि अब उन्हें अपनी बात सिद्ध करने के लिए पुख्ता सबूत राष्ट्रपति भवन में जमा करने होंगे।
मतदाता सूची पुनरीक्षण और भविष्य की राह
यह पूरा विवाद मुख्य रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कथित अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है। विपक्षी गठबंधन लंबे समय से इस प्रक्रिया को लेकर मुखर है और चुनाव आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है। उनका कहना है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान प्रणाली लोकतंत्र की बुनियाद है जिसे कमजोर किया जा रहा है। राहुल गांधी ने अफसोस जताया कि उन्हें राष्ट्रपति से उन सवालों का जवाब नहीं मिला जिनकी उन्हें उम्मीद थी कि वोट चोरी की घटनाओं को खारिज कर दिया जाएगा। अब विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाने और विरोध प्रदर्शनों को तेज करने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर जिस तरह के दावे विपक्ष द्वारा किए गए हैं, उससे आने वाले समय में राजनीतिक हलचल और अधिक तेज होने की संभावना बनी हुई है। चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर उठते ये सवाल भारतीय लोकतांत्रिक ढांचे के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आए हैं।