Lucknow Desk : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई है। जिसके चलते प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है। वहीं अगर मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर एक सीट के लिए करीब 37 प्रथम वरीयता वोटों का गणित बन रहा है। संख्या बल के हिसाब से बीजेपी और उसके सहयोगी दल करीब आठ सीटों की स्थिति में हैं, जबकि समाजवादी पार्टी दो सीटों पर मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। लेकिन इस बार सबसे ज्यादा बात इस चीज की है कि बीजेपी यानी भारतीय जनता पार्टी इन सीटों पर किन लोगों को अवसर देती है। क्योंकि पार्टी के संभावित उम्मीदवारों को लेकर कई नाम सामने आ रहे हैं। इनमें पूर्व सांसद वरुण गांधी, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी के नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में हैं। हालांकि बीजेपी ने अभी इन नामों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसलिए फिलहाल इन्हें संभावित दावेदारों के तौर पर ही देखा जा रहा है। वरुण गांधी के नाम पर फिर चर्चा वरुण गांधी लंबे समय तक बीजेपी की राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वह 2009 में सुल्तानपुर और 2019 में पीलीभीत से लोकसभा सांसद चुने गए थे।
2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें पीलीभीत से उम्मीदवार नहीं बनाया था। अब राज्यसभा चुनाव से पहले उनका नाम संभावित दावेदारों की चर्चा में आने से राजनीतिक हलकों में उनकी संभावित वापसी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि बीजेपी उन्हें राज्यसभा भेजने पर विचार कर रही है या नहीं। अंतिम तस्वीर पार्टी की आधिकारिक उम्मीदवार सूची जारी होने के बाद ही सामने आएगी। स्मृति ईरानी का नाम भी चर्चा में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का नाम भी संभावित उम्मीदवारों की सूची में चर्चा का विषय बना हुआ है। 2024 के लोकसभा चुनाव में वह अमेठी से चुनाव हार गई थीं। इसके बावजूद बीजेपी संगठन में उनकी सक्रियता बनी रही। अब राज्यसभा चुनाव के दौरान उनका नाम सामने आने के बाद पार्टी के अगले कदम पर नजर बनी हुई है। हरीश द्विवेदी समेत कई नाम पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी का नाम भी राज्यसभा की संभावित दावेदारी में सामने आया है। उनका राजनीतिक आधार पूर्वी उत्तर प्रदेश से जुड़ा रहा है। इसके अलावा मौजूदा और पूर्व बीजेपी नेताओं के कई अन्य नामों पर भी अलग-अलग रिपोर्टों में चर्चा हो रही है। 2027 से पहले सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण अहम राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के सामने सिर्फ सीटों का गणित नहीं है।
उम्मीदवारों का चयन पार्टी के लिए सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकता है। किस क्षेत्र को प्रतिनिधित्व मिलता है, किन सामाजिक समूहों को जगह मिलती है और पुराने नेताओं में से किसे दोबारा मौका मिलता है, इन फैसलों पर राजनीतिक नजर रहेगी। हालांकि उम्मीदवार चयन को लेकर पार्टी की आधिकारिक रणनीति अभी सामने नहीं आई है। इसलिए सामाजिक समीकरण या किसी नेता को दोबारा सक्रिय करने जैसे मुद्दों को फिलहाल राजनीतिक विश्लेषण और संभावनाओं के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। 16 अक्टूबर को होगा मतदान चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होगा। नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है, जबकि 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी। 9 अक्टूबर तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। मतदान के बाद उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी। ऐसे में अब सभी की नजर बीजेपी की उम्मीदवार सूची पर है। राज्यसभा चुनाव के जरिए पार्टी किन चेहरों को मौका देती है और किन नेताओं को दोबारा संसद भेजती है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इन फैसलों को उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।