कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का जामनगर जाना क्या भारत की अहमियत बताता है?      फ़्रांस के राष्ट्रपति विदेशी नेताओं पर भड़के, 'इस्लामी और प्रवासी भीड़' के आरोप पर दिया जवाब      मुझे गालियां पड़ेंगी, लेकिन...; योगेंद्र यादव ने कहा- अभी मोदी का इस्तीफा नहीं चाहते लोग      सऊदी अरब में दो बांग्लादेशियों को मौत की सज़ा दिए जाने से जुड़े वे सवाल जो हैं अनसुलझे      असम सरकार का बड़ा फैसला, रिटायरमेंट से 1 साल पहले शुरू होगी पेंशन की प्रक्रिया      Tiger Shroff Attack Case में बड़ा खुलासा, वारदात से पहले शूटरों ने की थी बंदूक चलाने की प्रैक्टिस, हुआ था म      PM बोले-कुछ लोग विदेशों में भारत को बदनाम कर रहे: कांग्रेस कब तक अपने फेल प्रोडक्ट की लॉन्चिंग के लिए देश क...      ज्ञानेश कुमार पर आर-पार, इस बार बीजेपी भी तैयार... SIR पर कल फिर छिड़ेगा संग्राम!     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
राजनीति

युवा आंदोलनों का नया मोड़: प्रदर्शनों में अब रोजगार के साथ संस्थाओं पर उठ रहे सवाल

देशभर में युवाओं के विरोध प्रदर्शन अब केवल नौकरियों और परीक्षा तक सीमित नहीं रहे हैं। प्रदर्शनकारी अब मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।

A
Ankit Yadav
12 अक्ट 2026, 11:39
युवा आंदोलनों का नया मोड़: प्रदर्शनों में अब रोजगार के साथ संस्थाओं पर उठ रहे सवाल

बदलता हुआ विरोध का दायरा

साल 2026 में युवाओं से जुड़े विरोध प्रदर्शनों का स्वरूप व्यापक होता जा रहा है। पहले जो आंदोलन केवल रोजगार और परीक्षाओं की अनिश्चितता तक सीमित थे, वे अब संवैधानिक संस्थाओं तक पहुँच गए हैं। दिल्ली और अन्य शहरों की सड़कों पर उतर रहे युवा समूह अब मतदाता सूची के प्रबंधन और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर भी अपना आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं। सवाल यह है कि क्या यह महज राजनीतिक लामबंदी है या व्यवस्था के प्रति अविश्वास का परिणाम? विशेषज्ञ मान रहे हैं कि युवा केवल नौकरी की कमी से ही परेशान नहीं हैं, बल्कि उन्हें व्यवस्था से न्याय मिलने पर भी संदेह होने लगा है। सड़कों पर उमड़ती भीड़ यह संकेत दे रही है कि सरकार और प्रशासन के प्रति एक गहरा असंतोष पनप रहा है। यह विरोध केवल सरकार की किसी नीति के खिलाफ नहीं, बल्कि उस पूरी प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहा है जिस पर आम नागरिकों का भरोसा टिका हुआ है।

राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों की राय

भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रोफेसर गौरव वल्लभ का कहना है कि सरकार युवाओं की असहमति का सम्मान करती है और उनकी शिकायतों के समाधान के लिए समितियां भी बनाई गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल इन आंदोलनों का इस्तेमाल अपने स्वार्थ के लिए कर रहे हैं और प्रदर्शनकारियों को देश विरोधी ताकतों से सावधान रहना चाहिए। वहीं, राजनीतिक विश्लेषक नीरजा चौधरी का मानना है कि मध्यम वर्ग, जो पहले भाजपा का मजबूत समर्थक रहा है, अब उसमें भी असंतोष साफ दिख रहा है। उनका कहना है कि अगर लोगों को लगता है कि मतदाता सूची से नाम हटाकर उनके वोट देने का अधिकार छीना जा रहा है, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। विपक्षी दल, जिनमें कांग्रेस, बीजू जनता दल और अरविंद केजरीवाल की पार्टी शामिल हैं, अब इन आंदोलनों के साथ जुड़ते जा रहे हैं। 20 जुलाई को संसद के सामने हुई हिंसा के बाद से सरकार के प्रति लोगों का डर भी कम होता दिखाई दे रहा है।

आंकड़ों और भविष्य का आकलन

पिछले 30 से 35 वर्षों के सर्वेक्षणों का विश्लेषण करें तो बेरोजगारी हमेशा से ही युवाओं के लिए सबसे बड़ी समस्या बनी रही है। सीएसडीएस के राजनीतिक विश्लेषक संजय कुमार स्पष्ट करते हैं कि आज के प्रदर्शन अचानक उत्पन्न नहीं हुए हैं, बल्कि पिछले 10 से 15 वर्षों में जमा हुई हताशा का परिणाम हैं। कुमार के अनुसार, लोगों की मुख्य नाराजगी चुनाव आयोग को लेकर है, विशेष रूप से मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर। उनका तर्क है कि यह प्रदर्शन सरकार के कामकाज के खिलाफ नहीं, बल्कि चुनाव आयोग के प्रबंधन के खिलाफ है। हालांकि, चुनाव का समय आने पर स्थिति बदल सकती है। जब उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में चुनाव होंगे, तो ये विरोध प्रदर्शन पीछे छूट सकते हैं और राजनीतिक दलों के चुनाव मुद्दे हावी हो जाएंगे। मतदाता उस समय केवल इन शिकायतों के आधार पर ही नहीं, बल्कि विभिन्न मुद्दों को ध्यान में रखकर अपने वोट का फैसला करेंगे।

कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज