रूस से रवाना हुआ डीजल टैंकर
अमेरिका में ऊर्जा उत्पादों के दाम आसमान छू रहे हैं और इस स्थिति से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। माल्टा के ध्वज वाला पोत एगियोई फानेंदेस रूसी बंदरगाह प्रिमोर्स्क से अमेरिका की तरफ निकल चुका है। ऊर्जा क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर रखने वाली संस्था एनर्जी एस्पेक्ट्स के पास मौजूद सूचना के मुताबिक इस समुद्री जहाज पर करीब दो लाख अट्ठानवे हजार बैरल डीजल लादा गया है। यह जलपोत आगामी दस नवंबर तक न्यूयार्क बंदरगाह पर अपनी मंजिल हासिल कर सकता है। अमेरिकी सरकार और रूस के शीर्ष नेतृत्व के बीच वैश्विक ईंधन बाजार में आपूर्ति बढ़ाने को लेकर हाल ही में आपसी रजामंदी बनी थी। इसी सहमति के परिणाम स्वरूप माल्टा के झंडे वाले इस टैंकर को रवाना किया गया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इस संबंध में पुष्टि की है कि रूसी ऊर्जा मंत्रालय ने इस शुरुआती पोत के प्रस्थान की आधिकारिक सूचना दी है। इसके अलावा भविष्य में भी इसी तरह से ईंधन की खेप नियमित रूप से भेजे जाने की संभावना पर विचार चल रहा है।
प्रतिबंधों में ढील और अमेरिकी प्रयास
अमेरिकी प्रशासन ने कुछ समय पहले रूसी राष्ट्र पर लागू कुछ सख्त प्रतिबंधों में नरमी बरतने का फैसला किया था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प रूस के साथ कूटनीतिक रिश्ते बेहतर करने और यूक्रेन संघर्ष रोकने के लिए दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इसी नीति के तहत कुछ पाबंदियों में राहत देकर ईंधन आपूर्ति बढ़ाने के रास्ते खोले गए हैं। हालांकि अमेरिका में प्रतिदिन डीजल की कुल खपत लगभग अड़तीस लाख बैरल के आसपास है। ऐसे में रूस से आने वाली यह दो लाख अट्ठानवे हजार बैरल डीजल की मात्रा देश की एक दिन की जरूरत भी पूरी करने के लिए पर्याप्त नहीं है। बाजार विश्लेषकों का आकलन है कि इस पहली खेप का स्थानीय बाजारों में कीमतों पर असर बहुत सीमित रहने वाला है। डीजल के दाम कम करने के लिए अमेरिकी सरकार ने कई अन्य मोर्चों पर भी पहल की है। इनमें बिना सड़क पर चलने वाले वाहनों के लिए खास डीजल के भारी इस्तेमाल की अनुमति देना शामिल है। इसके अलावा यूरोपीय देशों पर अपने डीजल भंडार को बाजार में उतारने के वास्ते दबाव भी डाला जा रहा है।
बढ़ती कीमतें और वैश्विक प्रभाव
वर्तमान वर्ष के दौरान अमेरिका के भीतर डीजल की औसत खुदरा कीमत तीन डॉलर पचपन सेंट प्रति गैलन से बढ़कर छह डॉलर बत्तीस सेंट प्रति गैलन तक पहुंच चुकी है। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के साथ साथ ईरान युद्ध के कारण भी कच्चे तेल की आपूर्ति प्रणाली बुरी तरह लड़खड़ा गई है। बैंक आफ अमेरिका के जिंस मामलों के विशेषज्ञ फ्रांसिस्को ब्लांच के अनुसार दुनिया भर में रिफाइंड ईंधन की उपलब्धता लगातार घट रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास मालवाहक जहाजों पर होने वाले हमलों और रूसी तेलशोधक कारखानों पर पड़ी मार ने भी आपूर्ति को बाधित किया है। ईंधन महंगा होने का प्रतिकूल असर केवल निजी वाहन चालकों तक ही सीमित नहीं रहता है बल्कि इसका दायरा बहुत व्यापक है। कृषि क्षेत्र माल की ढुलाई और खाद्य सामग्रियों के दाम भी इससे सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं। परिवहन लागत बढ़ने से औद्योगिक उत्पादन खर्च में भी इजाफा होता है जिसका अंतिम आर्थिक बोझ आम जनता की जेब पर ही पड़ता है।