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राजनीतिक अनिश्चितता: इजरायल में चुनाव के बाद भी सरकार गठन पर फंसा पेंच

इजरायल में चुनाव संपन्न होने के बावजूद नई सरकार के गठन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और विपक्षी नेता गादी आइजनकोट दोनों ही बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल करने में असफल रहे हैं। देश की राजनीति में किसी एक दल को पूर्ण बहुमत न मिलने के कारण छोटी पार्टियों और राजनीतिक गठजोड़ की भूमिका बेहद अहम हो गई है।

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Ankit Yadav
30 अक्ट 2026, 13:11
राजनीतिक अनिश्चितता: इजरायल में चुनाव के बाद भी सरकार गठन पर फंसा पेंच

चुनाव परिणाम और बहुमत का अधूरा आंकड़ा

इजरायल में हालिया चुनाव के शुरुआती आंकड़े सामने आ चुके हैं और देश की संसद कुल 120 सीटों पर आधारित है। इन प्रारंभिक रुझानों के अनुसार प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का नेतृत्व करने वाला गठबंधन 53 सीटों पर आगे चल रहा है। वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल के नेता गादी आइजनकोट के पाले में लगभग 48 सीटें जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके अतिरिक्त विभिन्न अरब पार्टियों के खातों में कुल 19 सीटें जाने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं। इजरायल के संविधान और नियमों के तहत किसी भी राजनीतिक दल या मोर्चे को सरकार बनाने के वास्ते कम से कम 61 सांसदों का समर्थन होना अनिवार्य माना गया है। इस प्रकार से देखा जाए तो प्रधानमंत्री नेतन्याहू को अपने खेमे में बहुमत साबित करने के लिए और 8 अतिरिक्त सांसदों के समर्थन की सख्त दरकार है। वर्तमान स्थिति यह है कि मैदान में उतरे किसी भी प्रमुख गठबंधन के पास अकेले अपने बूते पर सरकार स्थापित करने लायक पर्याप्त संख्या बल मौजूद नहीं है। ऐसे हालात में दोनों ही मुख्य पक्षों को अन्य दलों की मदद लेनी ही होगी।

कार्यवाहक सरकार और राष्ट्रपति की भूमिका

इजरायल के मौजूदा चुनावी नियमों के मुताबिक मतदान प्रक्रिया खत्म होने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री को अपने पद से इस्तीफा देने की कोई बाध्यता नहीं होती है। जब तक विधिवत रूप से नई सरकार का गठन नहीं हो जाता तब तक मौजूदा प्रधानमंत्री और उनकी पूरी कैबिनेट अपने प्रशासनिक दायित्व संभालती रहती है। इस व्यवस्था को कार्यवाहक सरकार के रूप में जाना जाता है जिसका सीधा अर्थ यह निकलता है कि यदि नेतन्याहू का गुट जादुई आंकड़ा नहीं जुटा पाता है तब भी वे पद पर बने रह सकते हैं। हालांकि यह अवधि इस बात पर पूरी तरह से निर्भर करती है कि नया मंत्रिमंडल अस्तित्व में आने में कितना अधिक समय लगाता है। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद देश के राष्ट्रपति तमाम प्रमुख राजनीतिक दलों के नुमाइंदों के साथ विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू करते हैं। राष्ट्रपति उस खास सांसद को सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपते हैं जिसके पास संसद में बहुमत जुटाने की सबसे मजबूत संभावना दिखाई देती है। शुरुआत के चरण में सरकार का गठन करने के लिए संबंधित नेता को कुल 28 दिनों का समय प्रदान किया जाता है। यदि आवश्यक समझा जाए तो देश के राष्ट्रपति द्वारा 14 दिनों की अतिरिक्त मोहलत भी दी जा सकती है जिसके भीतर गठबंधन की कवायद करनी होती है।

गठबंधन की कवायद और दोबारा चुनाव की आशंका

इजरायल की संपूर्ण राजनीतिक व्यवस्था में मिलीजुली सरकारों और आपसी गठबंधनों का इतिहास बहुत पुराना और निर्णायक रहा है। यहां पर किसी एक अकेली पार्टी को अपने दम पर स्पष्ट बहुमत हासिल करना बेहद कठिन कार्य माना जाता है। यही मुख्य वजह है कि छोटी राजनीतिक पार्टियां सरकार के गठन में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं। इस समय नेतन्याहू और आइजनकोट दोनों ही नेता अन्य दलों को अपने पाले में लाने के लिए राजनीतिक वार्ताओं को तेज करने की तैयारी में हैं। यदि तमाम राजनीतिक दलों के बीच आपसी बातचीत के सारे प्रयास पूरी तरह से विफल साबित होते हैं तो देश में दोबारा चुनाव कराने की नौबत आ सकती है। ऐसी आपात स्थिति से निपटने के लिए संसद को समय से पहले भंग करने की लंबी कानूनी प्रक्रिया का रास्ता अपनाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के संपन्न होने में कई हफ्तों या उससे भी अधिक लंबे समय की अवधि लग सकती है। इस लंबे अंतराल के दौरान नई सरकार के शपथ लेने तक नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते रहेंगे। हालांकि कार्यवाहक सरकार से यह उम्मीद की जाती है कि वह बड़े नीतिगत और सामरिक फैसले लेते समय पूरी तरह से सावधानी बरते। अगर कोई भी गुट बहुमत नहीं जुटा पाता है और फिर से चुनाव कराने पड़ते हैं तो यह राजनीतिक प्रक्रिया अगले साल तक भी खिंच सकती है।

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