कंटाप
NEWS
शनिवार, 31 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
स्वदेशी परमाणु घड़ी के साथ इसरो के NVS-03 की सफल लॉन्चिंग, नेविगेशन उपग्रह कक्षा में स्थापित      नेतन्याहू के बहुमत से पिछड़ने पर अरब मीडिया में क्या कहा जा रहा है      95 साल बाद जनगणना में जाति पूछी जाएगी: यूपी-पंजाब समेत 5 चुनावी राज्यों में फिलहाल नहीं; बाकी देश में 25 जन...      बंगाल की खाड़ी में एक के बाद एक क्यों आ रहे समुद्री तूफान? 1970 वाले कनेक्शन का रिपोर्ट में खुलासा      आज का एक्सप्लेनर: गोहत्या पर 3 लोगों को उम्रकैद, कोर्ट बोला- सजा नहीं, तो गोमाता विलुप्त हो जाएंगी; क्या कह...      कल का मौसम, 31 अक्टूबर: शनिवार को 25 राज्यों में होगी बारिश, 50-60 की स्पीड से चलेगी हवा      अभिजीत दीपके से एक कदम आगे नेहा बोरा, समर्थन दोनों का लेकिन... विपक्ष की रामलीला मैदान रैली पर नया ट्विस्ट      'मोदी कहीं नहीं जाएगा' के नारों से गूंजा गुजरात, PM बोले- 'आखिरी सांस तक करूंगा देश की सेवा'     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
विदेश

इजरायल चुनाव परिणाम: लिकुड पार्टी सबसे बड़ी, बहुमत के लिए संघर्ष जारी

इजरायल की केंद्रीय चुनाव समिति ने राष्ट्रीय चुनाव के अंतिम नतीजों की घोषणा कर दी है। लिकुड पार्टी सबसे बड़ी दल बनकर उभरी है, लेकिन सरकार गठन की तस्वीर अभी भी उलझी हुई है।

A
Ankit Yadav
30 अक्ट 2026, 12:53
इजरायल चुनाव परिणाम: लिकुड पार्टी सबसे बड़ी, बहुमत के लिए संघर्ष जारी

चुनाव नतीजों की अंतिम घोषणा और संसद की स्थिति

इजरायल की केंद्रीय चुनाव समिति ने हाल ही में संपन्न हुए राष्ट्रीय चुनावों के आधिकारिक परिणामों को सार्वजनिक कर दिया है। इन नतीजों के साथ ही 26वीं नेसेट यानी संसद में सीटों का स्पष्ट बंटवारा हो गया है। नई संसद का शपथ ग्रहण समारोह 10 नवंबर को आयोजित किया जाएगा। इस चुनाव में बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली लिकुड पार्टी ने सबसे ज्यादा 27 सीटें हासिल की हैं और वह देश की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति के रूप में सामने आई है। हालांकि, उनके समर्थक गुट को सरकार बनाने के लिए आवश्यक स्पष्ट बहुमत नहीं मिल सका है। उनके पास फिलहाल केवल 53 सीटें हैं, जो सरकार के गठन के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही हैं। इस चुनाव प्रक्रिया में 77.9 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो इस देश के लोकतांत्रिक ढांचे की सक्रियता को दर्शाता है। कई छोटी पार्टियां जैसे कि द रिजर्व्हिस्ट्स और पीपुल ऑफ इजरायल 3.25 प्रतिशत की अनिवार्य चुनावी दहलीज को पार करने में पूरी तरह विफल रहीं और संसद में जगह नहीं बना पाईं।

सरकार गठन की जटिलता और राजनीतिक समन्वय के प्रयास

देश में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी असमंजस और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। आधिकारिक चुनावी परिणाम 4 नवंबर को राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग को सौंपे जाएंगे। इसके बाद राष्ट्रपति अगली सरकार के गठन के लिए किसी उम्मीदवार को नामित करने से पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत परामर्श करेंगे। इन राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच, सरकार बनाने की संभावनाओं को तलाशने के लिए नेतन्याहू ने वित्त मंत्री बेजेलेल स्मोट्रिच के साथ मुलाकात की है ताकि भविष्य की रणनीति और प्रयासों में समन्वय स्थापित किया जा सके। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इन नतीजों पर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, जिनमें अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली ने नेतन्याहू को उनकी इस जीत के लिए बधाई दी है और दोनों देशों के बीच भविष्य में भी रणनीतिक गठबंधन जारी रखने पर जोर दिया है। फिलहाल देश में एक स्थिर सरकार बनाने की राह काफी चुनौतीपूर्ण और कठिन बनी हुई है। विभिन्न राजनीतिक हलकों में एकता सरकारों और अल्पसंख्यक प्रशासनों के गठन को लेकर चर्चा की जा रही है, लेकिन देश के मौजूदा कड़े राजनीतिक रुख को देखते हुए इनमें से कई विकल्प व्यावहारिक रूप से असंभव प्रतीत हो रहे हैं।

अगले कदम और संभावित राजनीतिक अनिश्चितता

इजरायल के राजनीतिक भविष्य के लिए आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक साबित होने वाले हैं। यदि राष्ट्रपति द्वारा नामित किया गया नेता निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवश्यक बहुमत जुटाकर सरकार बनाने में विफल रहता है, तो जनादेश किसी अन्य वैकल्पिक व्यक्ति को दिया जा सकता है। यह प्रक्रिया सत्ता की खींचतान को और अधिक जटिल बना सकती है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यदि तय समय के भीतर गठबंधन सरकार का गठन संभव नहीं हो पाता है, तो देश को एक बार फिर नए चुनावों की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। नए चुनाव होने की स्थिति में मौजूदा राजनीतिक जटिलताएं और गहरा सकती हैं, जिससे देश की प्रशासनिक व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने का खतरा बना रहेगा। आम जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें अब 4 नवंबर के घटनाक्रम पर टिकी हैं, जब राष्ट्रपति की औपचारिक परामर्श प्रक्रिया शुरू होगी। सरकार गठन की विफलता न केवल राजनीतिक अस्थिरता को जन्म देगी, बल्कि देश की नीतिगत प्राथमिकताओं को भी अनिश्चितता के दौर में धकेल सकती है। फिलहाल सभी राजनीतिक दल अपनी ताकत को संयोजित करने और गठबंधन के लिए नए समीकरण बिठाने में जुटे हुए हैं ताकि किसी तरह की स्थिर व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके और नए चुनावों की नौबत न आए।

कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज