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विदेश

नोबेल पुरस्कार पर दावा: डोनाल्ड ट्रंप ने आठ युद्ध रोकने की बात दोहराई

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा की एक रैली में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल के दौरान विभिन्न देशों के बीच कुल आठ लड़ाइयां थमीं। हालांकि, इसके बावजूद उन्हें प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार नहीं मिला।

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Ankit Yadav
24 अक्ट 2026, 14:22
नोबेल पुरस्कार पर दावा: डोनाल्ड ट्रंप ने आठ युद्ध रोकने की बात दोहराई

फ्लोरिडा में ट्रंप का बड़ा बयान

अमेरिका के प्रमुख डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा राज्य में एक जनसभा को संबोधित करते हुए अपने कूटनीतिक प्रयासों का जिक्र किया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी व्यक्त की कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके शांति स्थापना के कामों को उचित सम्मान नहीं मिला। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्होंने दुनिया भर में कुल आठ अलग-अलग संघर्षों को समाप्त करवाया था। उनका तर्क था कि इतने बड़े पैमाने पर युद्ध रोकने के बावजूद उन्हें नोबेल प्राइज से वंचित रखा गया। इस दौरान उन्होंने परमाणु हथियारों से लैस दो पड़ोसी देशों के बीच तनाव कम करने का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उनके इस बयान ने एक बार फिर से वैश्विक स्तर पर राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दे दिया है। ट्रंप ने अपनी बात रखते हुए यह भी रेखांकित किया कि किस प्रकार उन्होंने कूटनीतिक दबाव का इस्तेमाल करके विदेशी मामलों में शांति बहाल करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके इन दावों पर विभिन्न पक्षों की ओर से लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जो इस मुद्दे को और अधिक तूल दे रही हैं।

टैरिफ की धमकी से संघर्ष विराम का दावा

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण के दौरान भारत और दोनों देशों के बीच हुए सैन्य गतिरोध को रोकने की पूरी कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि उन्होंने दोनों परमाणु शक्ति संपन्न सरकारों को साफ चेतावनी दी थी। चेतावनी के अनुसार, यदि उनके बीच हथियारों की लड़ाई जारी रहती है, तो अमेरिका उनके साथ किसी भी प्रकार का व्यापारिक संबंध नहीं रखेगा। इतना ही नहीं, उन्होंने दोनों पक्षों पर भारी भरकम 250 प्रतिशत का टैरिफ थोपने की बात कही थी, जिससे उनका सारा कारोबार ठप हो जाता। ट्रंप के अनुसार, इस कड़े आर्थिक प्रतिबंध के डर का असर तुरंत दिखाई दिया और सीमा पर युद्ध विराम लागू हो गया। उन्होंने अपने इस भाषण में यह भी दावा किया कि उस संघर्ष के कालखंड में कुल 11 विमानों को गिराया गया था। हालांकि, भारत सरकार ने इन विमानों के नुकसान संबंधी सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। इसके साथ ही, भारत ने किसी भी प्रकार के बाहरी हस्तक्षेप की बात को पूरी तरह से नकारते हुए स्पष्ट किया कि सीजफायर केवल दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के आपसी प्रयासों का परिणाम था।

ऑपरेशन सिंदूर और सीमा पर बनी सहमति

इस पूरे कूटनीतिक विवाद की पृष्ठभूमि अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में पर्यटकों पर हुए घातक आतंकी हमले से जुड़ी है। उस घटना के जवाब में भारतीय सुरक्षा बलों ने 7 मई 2025 को एक लक्षित कार्रवाई के रूप में ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की थी। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान और उसके नियंत्रण वाले कश्मीर क्षेत्र में मौजूद आतंकवादी नेटवर्क को पूरी तरह नेस्तनाबूद करना था। भारतीय सेना की इस कार्रवाई में आतंकियों के तमाम ठिकाने और लॉन्चपैड नेस्तनाबूद कर दिए गए थे। इसके बाद पाकिस्तानी पक्ष ने भारतीय नागरिक तथा सैन्य ठिकानों पर हमले की नाकाम कोशिशें कीं, जिन्हें मजबूत वायु रक्षा प्रणाली ने विफल कर दिया। बाद में भारतीय पक्ष ने ब्रह्मोस मिसाइलों का उपयोग करते हुए सीमा पार स्थित ग्यारह सैन्य हवाई अड्डों को सटीक निशाना बनाया और भारी तबाही मचाई। इस करारी कार्रवाई से घबराकर ही पाकिस्तानी डीजीएमओ ने भारतीय समकक्ष से संपर्क साधा और सैन्य गतिविधियों को रोकने का आग्रह किया। इसी आधार पर दोनों पड़ोसी देशों के बीच सीजफायर पर आपसी सहमति बनी थी, जिसमें किसी तीसरे देश की मध्यस्थता का कोई स्थान नहीं था।

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